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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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मोहम्मद मज़हर नियाज़ी

1966 | मियाँवाली, पाकिस्तान

मोहम्मद मज़हर नियाज़ी

ग़ज़ल 10

अशआर 12

ये कमरा बंद है चारों तरफ़ से

उदासी किस तरफ़ से रही है

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हज़ारों आँखें मुझे बे-ज़बाँ समझती हैं

जो देखता है मैं उस को सुनाई देता हूँ

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तू बहुत ख़ुश नज़र आता है मुझे इतना बता

मुझ से पहले भी कोई शख़्स यहाँ आया था

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शहर छोटा है मगर दिल है कुशादा इतना

हम बड़े शहर में होते तो समुंदर होते

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रास्ते की नमी बताती है

आबला-पा यहाँ से गुज़रे हैं

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