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मुमताज़ इक़बाल

2001 | दिल्ली, भारत

नई नस्ल के सलाहियत-मंद शायरों में शामिल, ग़ज़ल और नज़्म, दोनों असनाफ़ में मसरूफ़-ए-सुख़न

नई नस्ल के सलाहियत-मंद शायरों में शामिल, ग़ज़ल और नज़्म, दोनों असनाफ़ में मसरूफ़-ए-सुख़न

मुमताज़ इक़बाल का परिचय

मूल नाम : नौशाद अहमद

जन्म : 01 Jul 2001 | शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश

मुमताज़ इक़बाल (नौशाद अहमद) 1 जुलाई 2001 को शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में पैदा हुए। इब्तिदाई तालीम वतन ही में हासिल की। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में बैचलर्स और मास्टर्स डिग्री हासिल की। अलीगढ़ और दिल्ली की अदबी और फ़न्नी सरज़मीन ने उनकी तबीअत में शेर-ओ-सुख़न का ऐसा ज़ौक़-ओ-शौक़ पैदा किया कि बहुत कम अर्से में वो हिंदी-उर्दू की शेरी और अदबी महफ़िलों में शामिल हो गए। लगातार लिखने-पढ़ने के काम से वाबस्ता। हिंदी की मारूफ़ वेब और प्रिंट मैगज़ीन “सदानीरा” के लिए शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी, अफ़ज़ाल अहमद सय्यद, ज़ीशान साहिल, नसीर अहमद नासिर, अली अकबर नातिक़, सारा शगुफ़्ता (तर्जुमा), ख़ालिद जावेद, अम्मार इक़बाल और बलोची शायर मुनीर मोमिन की नज़्मों का लिप्यंतरण और इंतिख़ाब भी किया। इस वक़्त दिल्ली में मुक़ीम हैं और रेख़्ता के एडिटोरियल का हिस्सा हैं।

मुमताज़ इक़बाल की शायरी सादगी और गहराई का संगम है। वो अपने शेरों में हिज्र-ओ-विसाल, हुस्न-ओ-इश्क़, रूह-ओ-बदन बल्कि इंसान के दाख़िली और ख़ारिजी मसाइल को निहायत ख़ूबसूरती से बयान करते हैं। हर शेर में मानी का एक नया पहलू निकलता है, जो पढ़ने-सुनने वालों के लिए भी एक नया तज्रबा होता है। मुमताज़ इक़बाल का कलाम वक़्त के साथ अपनी मानवियत और अहमियत में इज़ाफ़ा कर रहा है, और ये बात उनकी शायरी और शख़्सियत के लिए किसी ख़ुशख़बरी से कम नहीं।

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