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नज़ीर अकबराबादी

1735 - 1830 | आगरा, भारत

मीर तक़ी ' मीर ' के समकालीन अग्रणी शायर जिन्होंने भारतीय संस्कृति और त्योहारों पर नज्में लिखीं। होली , दीवाली , श्रीकृष्ण पर नज़्मों के लिए मशहूर

मीर तक़ी ' मीर ' के समकालीन अग्रणी शायर जिन्होंने भारतीय संस्कृति और त्योहारों पर नज्में लिखीं। होली , दीवाली , श्रीकृष्ण पर नज़्मों के लिए मशहूर

ग़ज़ल 215

नज़्म 19

शेर 102

जुदा किसी से किसी का ग़रज़ हबीब हो

ये दाग़ वो है कि दुश्मन को भी नसीब हो

from their beloved separated none should be

such a fate should not befall even my enemy

from their beloved separated none should be

such a fate should not befall even my enemy

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ख़ुदा के वास्ते गुल को मेरे हाथ से लो

मुझे बू आती है इस में किसी बदन की सी

भुला दीं हम ने किताबें कि उस परी-रू के

किताबी चेहरे के आगे किताब है क्या चीज़

रुबाई 22

ई-पुस्तक 44

अशआर-ए-नज़ीर

 

1940

Bachchon Ke Nazeer

 

1959

Deewan-e-Nazeer

 

 

Deewan-e-Nazeer Akbarabadi

 

 

Deewan-e-Nazeer Akbarabadi

 

1942

Farhang-e-Nazeer

 

1991

इन्तिख़ाब नज़ीर अकबर आबादी

 

2001

Intikhab-e-Ghazliyat-e-Nazeer Akbarabadi

 

1994

Intikhab-e-Nazeer Akbarabadi

 

1970

इंतिख़ाब-ए-नज़ीर अकबराबादी

 

1985

वीडियो 20

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"Bahr-e-Taweel"

Zia Mohiuddin reads "Bahr-e-Taweel" nazeer akbarabadi ka likha hua ek sher hai jo be-inteha lamba hai. Ziya sahib ki khubsurat aawaaz mein us ka lutf dugna ho jaata hai. ज़िया मोहीउद्दीन

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टुक हिर्स-ओ-हवा को छोड़ मियाँ मत देस बिदेस फिरे मारा मुकेश

बंजारा-नामा

टुक हिर्स-ओ-हवा को छोड़ मियाँ मत देस बिदेस फिरे मारा अज्ञात

बंजारा-नामा

टुक हिर्स-ओ-हवा को छोड़ मियाँ मत देस बिदेस फिरे मारा अज्ञात

बंजारा-नामा

टुक हिर्स-ओ-हवा को छोड़ मियाँ मत देस बिदेस फिरे मारा मेहदी ज़हीर

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जब आदमी के पेट में आती हैं रोटियाँ जसविंदर सिंह

होली

आ धमके ऐश ओ तरब क्या क्या जब हुस्न दिखाया होली ने अज्ञात

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जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की छाया गांगुली

ऑडियो 8

उस के शरार-ए-हुस्न ने शो'ला जो इक दिखा दिया

न मैं दिल को अब हर मकाँ बेचता हूँ

नज़र पड़ा इक बुत-ए-परी-वश निराली सज-धज नई अदा का

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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