रियाज़ शाहिद के शेर
चाहत की भला कौन सुने राम-कहानी
इस शहर के सब लोग हैं बहरे उसे कहना
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आरज़ू-ए-विसाल तेरे लिए
दिल नहीं हारा जान हारी है
डालता है धमाल दिल गोया
'इश्क़ के बा'द इस की बारी है