आरज़ू शायरी

आरज़ूएं, तमन्नाएं, ख़्वाहिशें ज़िन्दगी में इतने रंग भरती हैं जिनका शुमार भी मुश्किल है। ज़िन्दगी के यही रंग जब शायरी मे ढलते हैं तो कमाल को हुस्न बिखेरते हैं। आरज़ू शायरी के हज़ारों नमूने उर्दू के हर दौर की शायरी में मौजूद हैं। रेख़्ता पर आरज़ू शायरी का यह ख़ूबसूरत गुलदस्ता हाज़िर हैः

आज तक दिल की आरज़ू है वही

फूल मुरझा गया है बू है वही

जलाल मानकपुरी

आरज़ू है कि तू यहाँ आए

और फिर उम्र भर जाए कहीं

नासिर काज़मी

आरज़ू हसरत और उम्मीद शिकायत आँसू

इक तिरा ज़िक्र था और बीच में क्या क्या निकला

सरवर आलम राज़

आरज़ू तेरी बरक़रार रहे

दिल का क्या है रहा रहा रहा

हसरत मोहानी

आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या

क्या बताऊँ कि मेरे दिल में है अरमाँ क्या क्या

अख़्तर शीरानी

अरमान वस्ल का मिरी नज़रों से ताड़ के

पहले ही से वो बैठ गए मुँह बिगाड़ के

लाला माधव राम जौहर

बाद मरने के भी छोड़ी रिफ़ाक़त मेरी

मेरी तुर्बत से लगी बैठी है हसरत मेरी

even after death my love did not forsake

at my grave my desires kept a steady wake

even after death my love did not forsake

at my grave my desires kept a steady wake

अमीर मीनाई

बाद-ए-तर्क-ए-आरज़ू बैठा हूँ कैसा मुतमइन

हो गई आसाँ हर इक मुश्किल ब-आसानी मिरी

तिलोकचंद महरूम

बड़ी आरज़ू थी हम को नए ख़्वाब देखने की

सो अब अपनी ज़िंदगी में नए ख़्वाब भर रहे हैं

उबैदुल्लाह अलीम

बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए

हम एक बार तिरी आरज़ू भी खो देते

मजरूह सुल्तानपुरी

बहुत अज़ीज़ थी ये ज़िंदगी मगर हम लोग

कभी कभी तो किसी आरज़ू में मर भी गए

अब्बास रिज़वी

डरता हूँ देख कर दिल-ए-बे-आरज़ू को मैं

सुनसान घर ये क्यूँ हो मेहमान तो गया

I'm fearful when I see this heart so hopeless and forlorn

why shouldn't this home be desolate, as the guest has gone

I'm fearful when I see this heart so hopeless and forlorn

why shouldn't this home be desolate, as the guest has gone

दाग़ देहलवी

दिल में वो भीड़ है कि ज़रा भी नहीं जगह

आप आइए मगर कोई अरमाँ निकाल के

जलील मानिकपूरी

दिल-ए-वीराँ को देखते क्या हो

ये वही आरज़ू की बस्ती है

सैफ़ुद्दीन सैफ़

एक भी ख़्वाहिश के हाथों में मेहंदी लग सकी

मेरे जज़्बों में दूल्हा बन सका अब तक कोई

इक़बाल साजिद

इक वो कि आरज़ुओं पे जीते हैं उम्र भर

इक हम कि हैं अभी से पशीमान-ए-आरज़ू!

अख़्तर शीरानी

ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना

ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते

अख़्तर शीरानी

है हुसूल-ए-आरज़ू का राज़ तर्क-ए-आरज़ू

मैं ने दुनिया छोड़ दी तो मिल गई दुनिया मुझे

सीमाब अकबराबादी

हमें भी देख कि हम आरज़ू के सहरा में

खिले हुए हैं किसी ज़ख़्म-ए-आरज़ू की तरह

मोहम्मद दीन तासीर

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले

बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

I have a thousand yearnings , each one afflicts me so

Many were fulfilled for sure, not enough although

I have a thousand yearnings , each one afflicts me so

Many were fulfilled for sure, not enough although

मिर्ज़ा ग़ालिब

हिकायत-ए-इश्क़ से भी दिल का इलाज मुमकिन नहीं कि अब भी

फ़िराक़ की तल्ख़ियाँ वही हैं विसाल की आरज़ू वही है

ग़ुलाम हुसैन साजिद

होती कहाँ है दिल से जुदा दिल की आरज़ू

जाता कहाँ है शम्अ को परवाना छोड़ कर

जलील मानिकपूरी

हम क्या करें अगर तिरी आरज़ू करें

दुनिया में और भी कोई तेरे सिवा है क्या

हसरत मोहानी

इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं

दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बाद

कैफ़ी आज़मी

इस लिए आरज़ू छुपाई है

मुँह से निकली हुई पराई है

क़मर जलालवी

जान-लेवा थीं ख़्वाहिशें वर्ना

वस्ल से इंतिज़ार अच्छा था

जौन एलिया

जब कोई नौजवान मरता है

आरज़ू का जहान मरता है

फ़ारूक़ नाज़की

जीने वालों से कहो कोई तमन्ना ढूँडें

हम तो आसूदा-ए-मंज़िल हैं हमारा क्या है

महमूद अयाज़

कभी मौज-ए-ख़्वाब में खो गया कभी थक के रेत पे सो गया

यूँही उम्र सारी गुज़ार दी फ़क़त आरज़ू-ए-विसाल में

असअ'द बदायुनी

कटती है आरज़ू के सहारे पे ज़िंदगी

कैसे कहूँ किसी की तमन्ना चाहिए

शाद आरफ़ी

ख़राब-ए-दहर मैं ख़ुद हुआ तू ने किया

जो कुछ किया तिरे मिलने की आरज़ू ने किया

ज़ैदी बलगामी

खुल गया उन की आरज़ू में ये राज़

ज़ीस्त अपनी नहीं पराई है

शकील बदायुनी

ख़्वाब, उम्मीद, तमन्नाएँ, तअल्लुक़, रिश्ते

जान ले लेते हैं आख़िर ये सहारे सारे

इमरान-उल-हक़ चौहान

ख़्वाहिशों ने डुबो दिया दिल को

वर्ना ये बहर-ए-बे-कराँ होता

इस्माइल मेरठी

किसी की तमन्ना निकलती रही

मिरी आरज़ू हाथ मलती रही

मुबारक अज़ीमाबादी

किसी से शिकवा-ए-महरूमी-ए-नियाज़ कर

ये देख ले कि तिरी आरज़ू तो ख़ाम नहीं

फ़िगार उन्नावी

किताब-ए-आरज़ू के गुम-शुदा कुछ बाब रक्खे हैं

तिरे तकिए के नीचे भी हमारे ख़्वाब रक्खे हैं

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

क्या वो ख़्वाहिश कि जिसे दिल भी समझता हो हक़ीर

आरज़ू वो है जो सीने में रहे नाज़ के साथ

अकबर इलाहाबादी

लहू टपका किसी की आरज़ू से

हमारी आरज़ू टपकी लहू से

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

लुत्फ़ दूना हो जो दोनों घर मिरे आबाद हों

तू रहे पहलू में तेरी आरज़ू दिल में रहे

जलील मानिकपूरी

मैं और उस ग़ुंचा-दहन की आरज़ू

आरज़ू की सादगी थी मैं था

अब्दुल हमीद अदम

मरते हैं आरज़ू में मरने की

मौत आती है पर नहीं आती

I die yearning as I hope for death

Death does come to me but then not quite

I die yearning as I hope for death

Death does come to me but then not quite

मिर्ज़ा ग़ालिब

मौत जाए क़ैद में सय्याद

आरज़ू हो अगर रिहाई की

रिन्द लखनवी

मिरी अपनी और उस की आरज़ू में फ़र्क़ ये था

मुझे बस वो उसे सारा ज़माना चाहिए था

बुशरा एजाज़

मेरी ये आरज़ू है वक़्त-ए-मर्ग

उस की आवाज़ कान में आवे

ग़मगीन देहलवी

मिलो मिलो मिलो इख़्तियार है तुम को

इस आरज़ू के सिवा और आरज़ू क्या है

मुबारक अज़ीमाबादी

मुद्दआ दूर तक गया लेकिन

आरज़ू लौट कर नहीं आई

अब्दुल हमीद अदम

मुद्दत से आरज़ू है ख़ुदा वो घड़ी करे

हम तुम पिएँ जो मिल के कहीं एक जा शराब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मुझे ये डर है तिरी आरज़ू मिट जाए

बहुत दिनों से तबीअत मिरी उदास नहीं

नासिर काज़मी

मुझ को ये आरज़ू वो उठाएँ नक़ाब ख़ुद

उन को ये इंतिज़ार तक़ाज़ा करे कोई

I had hoped she would unveil at her own behest

and she waits for someone to make a request

I had hoped she would unveil at her own behest

and she waits for someone to make a request

असरार-उल-हक़ मजाज़

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