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साहिर लुधियानवी

1921 - 1980 | मुंबई, भारत

अग्रणी प्रगतिशील शायरों में शामिल। मशहूर फ़िल्म गीतकार

अग्रणी प्रगतिशील शायरों में शामिल। मशहूर फ़िल्म गीतकार

ग़ज़ल 54

नज़्म 89

शेर 66

हर-चंद मिरी क़ुव्वत-ए-गुफ़्तार है महबूस

ख़ामोश मगर तब-ए-ख़ुद-आरा नहीं होती

मिरी नदीम मोहब्बत की रिफ़अ'तों से गिर

बुलंद बाम-ए-हरम ही नहीं कुछ और भी है

नालाँ हूँ मैं बेदारी-ए-एहसास के हाथों

दुनिया मिरे अफ़्कार की दुनिया नहीं होती

गीत 16

ई-पुस्तक 26

आओ कि कोई ख़्वाब बुनें

 

1973

बच्चे मन के सच्चे

 

1998

Gata Jaye Banjara

 

1964

Gata Jaye Banjara

 

 

कलाम-ए-साहिर लुधियानवी

 

2000

Kulliyat-e-Sahir

 

1995

Main Sahir Hoon

 

2015

Muntakhab Nazmen

 

1988

परछाइयाँ

 

1955

साहिर और उनकी शाइरी

 

 

चित्र शायरी 23

वीडियो 53

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अपना दिल पेश करूँ अपनी वफ़ा पेश करूँ

भारती विश्वनाथन

आज की रात मुरादों की बरात आई है

मोहम्मद रफ़ी

इतनी हसीन इतनी जवाँ रात क्या करें

मोहम्मद रफ़ी

ऐ शरीफ़ इंसानो

ख़ून अपना हो या पराया हो ज़ुल्फ़िक़ार अली बुख़ारी

ऐ शरीफ़ इंसानो

ख़ून अपना हो या पराया हो तौसीफ़ अख़्तर

कभी कभी

कभी कभी मिरे दिल में ख़याल आता है समीर खेरा

कभी कभी

कभी कभी मिरे दिल में ख़याल आता है मुकेश

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया

मोहम्मद रफ़ी

ख़ुद-कुशी से पहले

उफ़ ये बेदर्द सियाही ये हवा के झोंके Urdu Studio

ख़ूबसूरत मोड़

चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों महेन्द्र कपूर

ग़ैरों पे करम अपनों पे सितम

लता मंगेशकर

जुर्म-ए-उल्फ़त पे हमें लोग सज़ा देते हैं

राधिका चोपड़ा

ज़िंदगी-भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात

मोहम्मद रफ़ी

जीवन के सफ़र में राही

किशोर कुमार

जो बात तुझ में है तिरी तस्वीर में नहीं

मोहम्मद रफ़ी

तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम

मोहम्मद रफ़ी

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतना क़रीब से

किशोर कुमार

दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ

मोहम्मद रफ़ी

नज़र से दिल में समाने वाले मिरी मोहब्बत तिरे लिए है

आशा भोसले

नहीं किया तो कर के देख

मुकेश

पर्बतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है

मोहम्मद रफ़ी

मैं जागूँ सारी रैन सजन तुम सो जाओ

लता मंगेशकर

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया

मोहम्मद रफ़ी

मुझे गले से लगा लो बहुत उदास हूँ मैं

लता मंगेशकर

मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं

मोहम्मद रफ़ी

मता-ए-ग़ैर

मेरे ख़्वाबों के झरोकों को सजाने वाली Urdu Studio

मेरी तक़दीर में जलना है तो जल जाऊँगा

अनूप जलोटा

मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी कभी

लता मंगेशकर

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा

मोहम्मद रफ़ी

ये दुनिया दो-रंगी है

मोहम्मद रफ़ी

ये वादियाँ ये फ़ज़ाएँ बुला रही हैं तुम्हें

मोहम्मद रफ़ी

सब में शामिल हो मगर सब से जुदा लगती हो

मोहम्मद रफ़ी

ऑडियो 11

दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ

अक़ाएद वहम हैं मज़हब ख़याल-ए-ख़ाम है साक़ी

अब आएँ या न आएँ इधर पूछते चलो

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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