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उम्मतुर्रऊफ़ नसरीन

रावलपिंडी, पाकिस्तान

देखिए अब याद आइए आप

आज कल आप से ख़फ़ा हूँ मैं

मुरव्वत में होने लगा है इज़ाफ़ा

मोहब्बत में आने लगी है कमी

मैं ने बेताब हो के हाथ बढ़ाए

उस ने बेताब हो के चूम लिए

वो मुल्तफ़ित थे हम ही बयाँ कर सके हाल

मंज़िल के पास के क़दम डगमगा गए

क्या तुम्हें अहद-ए-मोहब्बत के वो लम्हे याद हैं

जब निगाहें बोलती थीं और हम ख़ामोश थे

तुम्हारी याद बड़ी ख़ुश-गवार थी लेकिन

दिल-ए-हज़ीं के लिए तल्ख़ियाँ बढ़ा भी गई