तुम तो शान से निकले थे ले हाथ में मेरा हाथ

डर कर दुनिया वालों से क्यूँ छोड़ दिया है साथ

पहले पहले प्यार की साजन पहली है बरसात

ओढ़ के लेटी याद तिरी और जाग के काटी रात

कब तक जान बचाए फूल पे ओस का नन्हा क़तरा

पत्तों की भी ओट में हो तो सूरज पल पल ख़तरा

दम भर में हुए सूखे पत्ते काँटे और बबूल

साजन जब तक आप यहाँ थे खिले रहे सब फूल

जाने कितने मौसम बीते तुम लौट के आए

मन दुखियारा बिरह का मारा कब तक आस लगाए

नैन झरोके जुगनू मेरे तारे पड़ गए माँद

जब साजन मुख देखे मेरा बोले पूरा चाँद