ग़म की शायरी
ग़म अगरचे जाँ-गुसिल है प कहाँ बचें कि दिल है
ग़म-ए-इश्क़ गर न होता ग़म-ए-रोज़गार होता
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में ग़ालिब कहते हैं कि दिल होना ही दुख की संभावना है, इसलिए दुख से बचना मुश्किल है। वे प्रेम के दुख को सांसारिक चिंताओं के दुख से तुलना करके दिखाते हैं। प्रेम का दुख तीखा है, पर उसमें एक तरह की गरिमा और अर्थ है; वरना आदमी बस रोज़मर्रा की परेशानियों में घिसता रहता। मतलब यह कि दुख टलता नहीं, बस उसका रूप बदल जाता है।
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में ग़ालिब कहते हैं कि दिल होना ही दुख की संभावना है, इसलिए दुख से बचना मुश्किल है। वे प्रेम के दुख को सांसारिक चिंताओं के दुख से तुलना करके दिखाते हैं। प्रेम का दुख तीखा है, पर उसमें एक तरह की गरिमा और अर्थ है; वरना आदमी बस रोज़मर्रा की परेशानियों में घिसता रहता। मतलब यह कि दुख टलता नहीं, बस उसका रूप बदल जाता है।