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अज़रा नक़वी

Khawateen Ka Mushaira | Jashn-e-Rekhta 2017

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आज के टॉप 5

गुलशन की फ़क़त फूलों से नहीं काँटों से भी ज़ीनत होती है

जीने के लिए इस दुनिया में ग़म की भी ज़रूरत होती है

सबा अफ़ग़ानी

हम तो तमाम उम्र तिरी ही अदा रहे

ये क्या हुआ कि फिर भी हमीं बेवफ़ा रहे

जमील मलिक

हम से कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर तो है उसे

वो यार बा-वफ़ा सही बेवफ़ा तो है

जमील मलिक

हम आप क़यामत से गुज़र क्यूँ नहीं जाते

जीने की शिकायत है तो मर क्यूँ नहीं जाते

महबूब ख़िज़ां

'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोली

उर्दू हिन्दी हिन्दोस्तानी

हफ़ीज़ जालंधरी
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आर्काइव
आज का शब्द

सबात

  • sabaat
  • ثبات

शब्दार्थ

stability/ permanence

कहा मैं ने गुल का है कितना सबात

कली ने ये सुन कर तबस्सुम किया

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आर्काइव

आज की प्रस्तुति

अपनी ग़ज़ल 'गो ज़रा सी बात पर बरसों के याराने गए' के लिए विख्यात, जिसे कई गायकों ने गाया है।

गो ज़रा सी बात पर बरसों के याराने गए

लेकिन इतना तो हुआ कुछ लोग पहचाने गए

पूर्ण ग़ज़ल देखें

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