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Urdu poets and poetry: Jashn-e-Rekhta 2017

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आज के टॉप 5

ज़मीन की कोख ही ज़ख़्मी नहीं अंधेरों से

है आसमाँ के भी सीने पे आफ़्ताब का ज़ख़्म

इब्न-ए-सफ़ी

ख़िराज माँग रही है वो शाह-बानू-ए-शहर

सो हम भी हदिया-ए-दस्त-ए-तलब गुज़ारते हैं

इरफ़ान सिद्दीक़ी

उस ग़ैरत-ए-नाहीद की हर तान है दीपक

शोला सा लपक जाए है आवाज़ तो देखो

मोमिन ख़ाँ मोमिन

ब-क़द्र-ए-पैमाना-ए-तख़य्युल सुरूर हर दिल में है ख़ुदी का

अगर हो ये फ़रेब-ए-पैहम तो दम निकल जाए आदमी का

जमील मज़हरी

देख रफ़्तार-ए-इंक़लाब 'फ़िराक़'

कितनी आहिस्ता और कितनी तेज़

फ़िराक़ गोरखपुरी
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आर्काइव
आज का शब्द

मुदावा

  • mudaavaa
  • مداوا

शब्दार्थ

cure/ redress

सब का तो मुदावा कर डाला अपना ही मुदावा कर सके

सब के तो गरेबाँ सी डाले अपना ही गरेबाँ भूल गए

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आर्काइव

आज की प्रस्तुति

उर्दू / हिंदवी के पहले शायर। मशहूर सूफ़ी हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के शागिर्द और संगीतज्ञ। तबला और सितार जैसे साज़ों का अविष्कार किया। अपनी ' पहेलियों ' के लिए प्रसिद्ध जो भारतीय लोक साहित्य का हिस्सा हैं। ' ज़े हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल ' जैसी ग़ज़ल लिखी जो उर्दू / हिंदवी शायरी का पहला नमूना है।

ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल दुराय नैनाँ बनाए बतियाँ

कि ताब-ए-हिज्राँ नदारम जाँ लेहू काहे लगाए छतियाँ

पूर्ण ग़ज़ल देखें

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अहमद शाह बुख़ारी 

2011 नॉन-फ़िक्शन

चौबीस ज़बानों की हिन्दुस्तानी कहानियाँ

शाइस्ता फाख़री 

2012 कि़स्सा-दास्तान

शुमारा नम्बर-299-293

अक़ीला शाहीन 

2005 शब ख़ून

नया आहंग

अख़्तर-उल-ईमान 

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पतझड़ कि आवाज़

कुर्रतुलऐन हैदर 

2011 पाठ्य पुस्तक

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