आज के टॉप 5

इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर सको तो आओ

मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है

मुस्तफ़ा ज़ैदी

इस आलम-ए-वीराँ में क्या अंजुमन-आराई

दो रोज़ की महफ़िल है इक उम्र की तन्हाई

सूफ़ी तबस्सुम

हयात ले के चलो काएनात ले के चलो

चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो

मख़दूम मुहिउद्दीन
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हज़ारों काम मोहब्बत में हैं मज़े के 'दाग़'

जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं

दाग़ देहलवी
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हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ

दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं

परवीन शाकिर
आज का शब्द

आज़ार

  • aazaar
  • آزار

शब्दार्थ

ailment/ hardship

तदबीर मेरे इश्क़ की क्या फ़ाएदा तबीब

अब जान ही के साथ ये आज़ार जाएगा

शब्दकोश
आर्काइव

आज की प्रस्तुति

स्वतंत्रता सेनानी और संविधान सभा के सदस्य। ' इंक़िलाब ज़िन्दाबाद ' का नारा दिया। कृष्ण भक्त , अपनी ग़ज़ल ' चुपके चुपके, रात दिन आँसू बहाना याद है ' के लिए प्रसिद्ध

रौशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम

दहका हुआ है आतिश-ए-गुल से चमन तमाम

पूर्ण ग़ज़ल देखें
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जावेद अख़्तर

Kuch Ishq Kiya Kuch Kaam Kiya I Javed Akhtar with Atika Ahmad Farooqui I Jashn-e-Rekhta 2017

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ई-पुस्तकालय

अनार कली

इम्तियाज़ अली ताज 

1931 नाटक / ड्रामा

शुमारा नम्बर-011

सईद शैख़ 

1994 अलामत

Qasida-e-Burda-e-Saeed

 

1928 क़सीदा

Khake

एवज़ सईद 

2006 स्केच /ख़ाका

Kulliyat-e-Majruh Sultanpuri

मजरूह सुल्तानपुरी 

2003 महाकाव्य

ई-पुस्तकालय

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