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मोहम्मद ज़ाकिर

Kahte Hain Jisko Urdu | Jashn-e-Rekhta 2017

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आज के टॉप 5

हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं

उम्रें बीत जाती हैं दिल को दिल बनाने में

बशीर बद्र

इक बार उस ने मुझ को देखा था मुस्कुरा कर

इतनी तो है हक़ीक़त बाक़ी कहानियाँ हैं

मेला राम वफ़ा
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हज़ारों काम मोहब्बत में हैं मज़े के 'दाग़'

जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं

दाग़ देहलवी
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कहीं ज़मीं से तअल्लुक़ ख़त्म हो जाए

बहुत ख़ुद को हवा में उछालिए साहिब

राजेन्द्र नाथ रहबर
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इन अंधेरों से परे इस शब-ए-ग़म से आगे

इक नई सुब्ह भी है शाम-ए-अलम से आगे

इशरत क़ादरी
आर्काइव
आज का शब्द

शुऊ'र

  • shu.uur
  • شعور

शब्दार्थ

sense / consciousness

सौ शेर एक जलसे में कहते थे हम 'अमीर'

जब तक शेर कहने का हम को शुऊर था

द्वारा अमीर मीनाई

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आर्काइव

जश्न

जन्मदिन

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर/रामायन पर अपनी नज़्म के लिए विख्यात/मशहूर शेर ‘जि़ंदगी क्या है अनासिर में ज़हूर-ए-तरतीब......’ के रचयिता

फ़ना का होश आना ज़िंदगी का दर्द-ए-सर जाना

अजल क्या है ख़ुमार-ए-बादा-ए-हस्ती उतर जाना

पूर्ण ग़ज़ल देखें

चकबस्त ब्रिज नारायण के बारे में शेयर कीजिए

ई-पुस्तकालय

उर्दू साहित्य का सबसे बड़ा ऑनलाइन संग्रह

नसर, नज्म और शेर

मंज़र अब्बास नक़वी 

1978 आलोचना

सुब्ह-ए-वतन

चकबस्त ब्रिज नारायण 

1985 काव्य संग्रह

Jannat Ki Jhalak

उपेन्द्र नाथ अश्क 

1984

शुमारा नम्बर-005

जमीलुद्दीन आली 

1964 हम क़लम

फ़िराक़ के लतीफ़े

मुश्ताक़ नक़वी 

1982 हास्य-व्यंग

ई-पुस्तकालय

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