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बैराग पर शेर

ख़ुद-कुशी क़त्ल-ए-अना तर्क-ए-तमन्ना बैराग

ज़िंदगी तेरे नज़र आने लगे हल कितने

रफ़ीआ शबनम आबिदी

पी के बैराग की उदासी सूँ

दिल पे मेरे सदा उदासी है

वली मोहम्मद वली

बताऊँ किस हवाले से उन्हें बैराग का मतलब

जो तारे पूछते हैं रात को घर क्यूँ नहीं जाता

प्रबुद्ध सौरभ

नय्या बाँधो नदी किनारे सखी

चाँद बैराग रात त्याग लगे

नासिर शहज़ाद
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जिस कूँ पिव के हिज्र का बैराग है

आह का मज्लिस में उस की राग है

सिराज औरंगाबादी

रोज़ मलते हैं मुँह पर अपने भभूत

इश्क़ में हम ने ले लिया बैराग

नूह नारवी

मीठे पानी की नद्दी क्यूँ बहे समुंदर ओर

जिस के मन में प्यार का धन हो क्यूँ ले वो बैराग

बाक़र नक़वी

रोज़ मलते हैं मुँह पर अपने भभूत

इश्क़ में हम ने ले लिया बैराग

नूह नारवी
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'माजिद' ने बैराग लिया है कोई ऐसी बात नहीं

इधर उधर की बातें कर के लोगों को समझाया कर

माजिद-अल-बाक़री

उस की बालक-हट के आगे घर छोड़ा बैराग लिया

देखें क्या दिन दिखलाता है अब ये मूरख मन बाबा

इलियास इश्क़ी