बेसबाती पर शेर
संसार में सब कुछ नश्वर
है, बे-सबात है। यह सच्चाई किसी से पोशीदा नहीं और शायरों से तो हर्गिज़ नहीं। जिस तरह दुनिया की चमक-दमक ने शायरों को अपनी तरफ़ खींचा है उसी तरफ़ इन के लम्हाती होने का सच भी शायरों ने बयान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी| बे-सबाती शायरी के ये नमूने इसी बात की दलील हैं।
ले साँस भी आहिस्ता कि नाज़ुक है बहुत काम
आफ़ाक़ की इस कारगह-ए-शीशागरी का
EXPLANATION #1
साँस भी धीरे लेना, क्योंकि यह काम बहुत नाज़ुक है।
यह सारी दुनिया काँच बनाने की कार्यशाला जैसी है, जहाँ ज़रा-सी ठोकर से सब टूट सकता है।
मीर तक़ी मीर ने संसार को काँच की कार्यशाला का रूपक दिया है—सुंदर, पर बहुत जल्दी टूट जाने वाला। “धीरे साँस लेना” का मतलब है कि जीवन में हर कदम सोच-समझकर रखना चाहिए, क्योंकि यहाँ सब कुछ बहुत कोमल है। इस शेर में डर और आदर दोनों का भाव है—अस्तित्व अनमोल है, लेकिन क्षणभंगुर। इसलिए बोलचाल और कर्म में नरमी व सावधानी की सीख मिलती है।
शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है
कहा मैं ने कितना है गुल का सबात
कली ने ये सुन कर तबस्सुम किया
EXPLANATION #1
मैंने कहा कि फूल की टिकने की ताकत बहुत कम होती है, वह जल्दी मुरझा जाता है।
यह सुनकर कली हल्के से मुसकरा दी।
यहाँ गुल यानी फूल सुंदरता और जीवन का संकेत है, जिसका टिकना बहुत थोड़ा है। कली की मुसकान में हल्का व्यंग्य और शांत स्वीकार दोनों हैं—वह जानती है कि उसका समय कम है, फिर भी वह खिलने से नहीं रुकती। भाव यह है कि क्षणभंगुरता के बीच भी जीने की नर्मी और साहस मौजूद है।
शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी
दुनिया है ख़्वाब हासिल-ए-दुनिया ख़याल है
इंसान ख़्वाब देख रहा है ख़याल में
सुनता हूँ बड़े ग़ौर से अफ़्साना-ए-हस्ती
कुछ ख़्वाब है कुछ अस्ल है कुछ तर्ज़-ए-अदा है
बे-सबाती चमन-ए-दहर की है जिन पे खुली
हवस-ए-रंग न वो ख़्वाहिश-ए-बू करते हैं
बे-सबाती ज़माने की नाचार
करनी मुझ को बयान पड़ती है
अब जान जिस्म-ए-ख़ाकी से तंग आ गई बहुत
कब तक इस एक टोकरी मिट्टी को ढोईए
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर आत्मा और शरीर के अंतर को सामने रखता है: शरीर मिट्टी का है और अब आत्मा को वह बोझ लगता है। “मिट्टी की टोकरी” कहकर कवि देह को सिर्फ पदार्थ मानता है, जो आखिर में मिट्टी में मिल जाती है। भाव में गहरी थकान, विरक्ति और मुक्त होने की चाह है।
पल में मनुश है राम पुजारी पल में चेला रावन का
पाप और पुन के बीच का धागा देखो कितना कच्चा है