Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Abdur Rahim Nashtar's Photo'

अब्दुर्रहीम नश्तर

1947 | कैम्पटी, भारत

शायर और गद्यकार, अपनी किताब ‘कोकन में उर्दू तालीम’ के लिए भी जाने जाते हैं

शायर और गद्यकार, अपनी किताब ‘कोकन में उर्दू तालीम’ के लिए भी जाने जाते हैं

अब्दुर्रहीम नश्तर के शेर

859
Favorite

श्रेणीबद्ध करें

देख रहा था जाते जाते हसरत से

सोच रहा होगा मैं उस को रोकूँगा

वो सो रहा है ख़ुदा दूर आसमानों में

फ़रिश्ते लोरियाँ गाते हैं उस के कानों में

मैं भी तालाब का ठहरा हुआ पानी था कभी

एक पत्थर ने रवाँ धार किया है मुझ को

मैं तेरी चाह में झूटा हवस में सच्चा हूँ

बुरा समझ ले मगर दूसरों से अच्छा हूँ

आवाज़ दे रहा है अकेला ख़ुदा मुझे

मैं उस को सुन रहा हूँ हवाओं के कान से

वो अजनबी तिरी बाँहों में जो रहा शब भर

किसे ख़बर कि वो दिन भर कहाँ रहा होगा

पान के ठेले होटल लोगों का जमघट

अपने तन्हा होने का एहसास भी क्या

आप सागर हैं तो सैराब करें प्यासे को

आप बादल हैं तो मुझ दश्त पे साया कीजिए

फटे पुराने बदन से किसे ख़रीद सकूँ

सजे हैं काँच के पैकर बड़ी दुकानों में

कुछ मधुर तानें फ़ज़ा में थरथरा कर रह गईं

धान के खेतों में चंचल पंछियों का शोर था

पत्थर ने पुकारा था मैं आवाज़ की धुन में

मौजों की तरह चारों तरफ़ फैल गया हूँ

अपनी ही ज़ात के सहरा में सुलगते हुए लोग

अपनी परछाईं से टकराए हय्यूलों से मिले

उस ने चलते चलते लफ़्ज़ों का ज़हराब

मेरे जज़्बों की प्याली में डाल दिया

फिर इक नए सफ़र पे चला हूँ मकान से

कोई पुकारता है मुझे आसमान से

Recitation

Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here

बोलिए