Waseem Barelvi's Photo'

वसीम बरेलवी

1940 | बरेली, भारत

लोकप्रिय शायर।

लोकप्रिय शायर।

95.7K
Favorite

श्रेणीबद्ध करें

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे

तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे

how do I hide the obvious, which from my face is clear

as you wish me to be seen, how do I thus appear

जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा

किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता

दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता

तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता

आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है

भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है

वो झूट बोल रहा था बड़े सलीक़े से

मैं ए'तिबार करता तो और क्या करता

तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना खो चुका हूँ मैं

कि तू मिल भी अगर जाए तो अब मिलने का ग़म होगा

रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी

देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है

तुम गए हो तो कुछ चाँदनी सी बातें हों

ज़मीं पे चाँद कहाँ रोज़ रोज़ उतरता है

how often does the moon condescend to come to earth

let us talk of love and joy now that you are here

आते आते मिरा नाम सा रह गया

उस के होंटों पे कुछ काँपता रह गया

तुम मेरी तरफ़ देखना छोड़ो तो बताऊँ

हर शख़्स तुम्हारी ही तरफ़ देख रहा है

शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ

कीजे मुझे क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ

वैसे तो इक आँसू ही बहा कर मुझे ले जाए

ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता

फूल तो फूल हैं आँखों से घिरे रहते हैं

काँटे बे-कार हिफ़ाज़त में लगे रहते हैं

वो दिन गए कि मोहब्बत थी जान की बाज़ी

किसी से अब कोई बिछड़े तो मर नहीं जाता

मोहब्बत में बिछड़ने का हुनर सब को नहीं आता

किसी को छोड़ना हो तो मुलाक़ातें बड़ी करना

ऐसे रिश्ते का भरम रखना कोई खेल नहीं

तेरा होना भी नहीं और तिरा कहलाना भी

मैं बोलता गया हूँ वो सुनता रहा ख़ामोश

ऐसे भी मेरी हार हुई है कभी कभी

शाम तक सुब्ह की नज़रों से उतर जाते हैं

इतने समझौतों पे जीते हैं कि मर जाते हैं

ग़म और होता सुन के गर आते वो 'वसीम'

अच्छा है मेरे हाल की उन को ख़बर नहीं

on knowing if she did not come the pain would be much worse

her ignorance of my condition is surely not a curse

उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में

इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए

मैं ने चाहा है तुझे आम से इंसाँ की तरह

तू मिरा ख़्वाब नहीं है जो बिखर जाएगा

झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए

और मैं था कि सच बोलता रह गया

पाने से किसी के है कुछ खोने से मतलब है

ये दुनिया है इसे तो कुछ कुछ होने से मतलब है

हमारे घर का पता पूछने से क्या हासिल

उदासियों की कोई शहरियत नहीं होती

शराफ़तों की यहाँ कोई अहमियत ही नहीं

किसी का कुछ बिगाड़ो तो कौन डरता है

वो मेरे घर नहीं आता मैं उस के घर नहीं जाता

मगर इन एहतियातों से तअल्लुक़ मर नहीं जाता

झूट के आगे पीछे दरिया चलते हैं

सच बोला तो प्यासा मारा जाएगा

मुसलसल हादसों से बस मुझे इतनी शिकायत है

कि ये आँसू बहाने की भी तो मोहलत नहीं देते

मैं भी उसे खोने का हुनर सीख पाया

उस को भी मुझे छोड़ के जाना नहीं आता

चराग़ घर का हो महफ़िल का हो कि मंदिर का

हवा के पास कोई मस्लहत नहीं होती

बहुत से ख़्वाब देखोगे तो आँखें

तुम्हारा साथ देना छोड़ देंगी

सभी रिश्ते गुलाबों की तरह ख़ुशबू नहीं देते

कुछ ऐसे भी तो होते हैं जो काँटे छोड़ जाते हैं

हर शख़्स दौड़ता है यहाँ भीड़ की तरफ़

फिर ये भी चाहता है उसे रास्ता मिले

मैं जिन दिनों तिरे बारे में सोचता हूँ बहुत

उन्हीं दिनों तो ये दुनिया समझ में आती है

मुझे पढ़ता कोई तो कैसे पढ़ता

मिरे चेहरे पे तुम लिक्खे हुए थे

कोई इशारा दिलासा कोई व'अदा मगर

जब आई शाम तिरा इंतिज़ार करने लगे

हम ये तो नहीं कहते कि हम तुझ से बड़े हैं

लेकिन ये बहुत है कि तिरे साथ खड़े हैं

किसी से कोई भी उम्मीद रखना छोड़ कर देखो

तो ये रिश्ता निभाना किस क़दर आसान हो जाए

जो मुझ में तुझ में चला रहा है बरसों से

कहीं हयात इसी फ़ासले का नाम हो

वो पूछता था मिरी आँख भीगने का सबब

मुझे बहाना बनाना भी तो नहीं आया

कुछ है कि जो घर दे नहीं पाता है किसी को

वर्ना कोई ऐसे तो सफ़र में नहीं रहता

उन से कह दो मुझे ख़ामोश ही रहने दे 'वसीम'

लब पे आएगी तो हर बात गिराँ गुज़रेगी

someone tell her to allow me to be silent pray

for if I speak she may not like what i have to say

मैं उस को आँसुओं से लिख रहा हूँ

कि मेरे ब'अद कोई पढ़ पाए

किसी ने रख दिए ममता-भरे दो हाथ क्या सर पर

मिरे अंदर कोई बच्चा बिलक कर रोने लगता है

इसी ख़याल से पलकों पे रुक गए आँसू

तिरी निगाह को शायद सुबूत-ए-ग़म मिले

with this thought my tears on my lashes do remain

that otherwise you may not find the proof of my pain

ज़रा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है

समुंदरों ही के लहजे में बात करता है

होंटों को रोज़ इक नए दरिया की आरज़ू

ले जाएगी ये प्यास की आवारगी कहाँ

भरे मकाँ का भी अपना नशा है क्या जाने

शराब-ख़ाने में रातें गुज़ारने वाला

इन्हें तो ख़ाक में मिलना ही था कि मेरे थे

ये अश्क कौन से ऊँचे घराने वाले थे

आज पी लेने दे जी लेने दे मुझ को साक़ी

कल मिरी रात ख़ुदा जाने कहाँ गुज़रेगी

let me drink today my dear let me live today

lord knows tomorrow where I am destined to stay