प्रेरणादायक शायरी

तरग़ीबी या प्रेरक शायरी उन लम्हों में भी हमारे साथ होती है जब परछाईं भी दूर भागने लगती है। ऐसी मुश्किल घड़ियाँ ज़िन्दगी में कभी भी रास्ता रोक कर खड़ी हो जाती हैं। हौसलों के चराग़ बुझने लगते हैं और उम्मीदों की लौ मद्धम पड़ जाती है। तरग़ीबी शायरी इन हालात में ढारस बंधाती और हिम्मत देती है। आप भी देखिए ये चंद अशआरः

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा

राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

sorrows other than love's longing does this life provide

comforts other than a lover's union too abide

sorrows other than love's longing does this life provide

comforts other than a lover's union too abide

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है

लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले

ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

अल्लामा इक़बाल

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं

अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं

अल्लामा इक़बाल

जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा

किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता

वसीम बरेलवी

मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर

लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया

मजरूह सुल्तानपुरी

चला जाता हूँ हँसता खेलता मौज-ए-हवादिस से

अगर आसानियाँ हों ज़िंदगी दुश्वार हो जाए

I go laughing playing with waves of adversity

If life were to be easy, unbearable it would be

I go laughing playing with waves of adversity

If life were to be easy, unbearable it would be

असग़र गोंडवी

कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं

नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है

अमीर मीनाई

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे

जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा हों

bear enmity with all your might, but this we should decide

if ever we be friends again, we are not mortified

bear enmity with all your might, but this we should decide

if ever we be friends again, we are not mortified

बशीर बद्र

हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं

हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं

जिगर मुरादाबादी

हम-सफ़र किसी हम-नशीं से निकलेगा

हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा

राहत इंदौरी

प्यासो रहो दश्त में बारिश के मुंतज़िर

मारो ज़मीं पे पाँव कि पानी निकल पड़े

इक़बाल साजिद

तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा

तिरे सामने आसमाँ और भी हैं

अल्लामा इक़बाल

मिरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा

इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा

अमीर क़ज़लबाश

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो

चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे

let the hands of innocents reach out for stars and moon

with education they'd become like us so very soon

let the hands of innocents reach out for stars and moon

with education they'd become like us so very soon

निदा फ़ाज़ली

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो

ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो

निदा फ़ाज़ली

उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए

कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए

इरफ़ान सिद्दीक़ी

हम परवरिश-ए-लौह-ओ-क़लम करते रहेंगे

जो दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगे

We will nourish the pen and tablet; we will tend them ever

We will write what the heart suffers; we will defend them ever

We will nourish the pen and tablet; we will tend them ever

We will write what the heart suffers; we will defend them ever

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दुश्मनी लाख सही ख़त्म कीजे रिश्ता

दिल मिले या मिले हाथ मिलाते रहिए

enmity however strong, the contact never break

hearts and minds may be apart, the hands must ever shake

enmity however strong, the contact never break

hearts and minds may be apart, the hands must ever shake

निदा फ़ाज़ली

रास्ता सोचते रहने से किधर बनता है

सर में सौदा हो तो दीवार में दर बनता है

जलील ’आली’

अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला

जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा

the winds will now decide what happens to the light

those lamps that have the strength, will survive the night

the winds will now decide what happens to the light

those lamps that have the strength, will survive the night

महशर बदायुनी

रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज

मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं

मिर्ज़ा ग़ालिब

इन अंधेरों से परे इस शब-ए-ग़म से आगे

इक नई सुब्ह भी है शाम-ए-अलम से आगे

इशरत क़ादरी

वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना हो मुमकिन

उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा

साहिर लुधियानवी

अभी से पाँव के छाले देखो

अभी यारो सफ़र की इब्तिदा है

एजाज़ रहमानी

हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें

वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं

साहिर लुधियानवी

हयात ले के चलो काएनात ले के चलो

चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो

मख़दूम मुहिउद्दीन

घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें

किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए

the mosques too far so for a while

some weeping child, let us make smile

the mosques too far so for a while

some weeping child, let us make smile

निदा फ़ाज़ली

अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल

हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया

जिगर मुरादाबादी

जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं

वही दुनिया बदलते जा रहे हैं

जिगर मुरादाबादी

तिरे माथे पे ये आँचल तो बहुत ही ख़ूब है लेकिन

तू इस आँचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था

असरार-उल-हक़ मजाज़

कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन

फिर इस के ब'अद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर

निदा फ़ाज़ली

कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता

एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो

दुष्यंत कुमार

नहीं तेरा नशेमन क़स्र-ए-सुल्तानी के गुम्बद पर

तू शाहीं है बसेरा कर पहाड़ों की चटानों में

अल्लामा इक़बाल

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है

बिस्मिल अज़ीमाबादी

लोग कहते हैं बदलता है ज़माना सब को

मर्द वो हैं जो ज़माने को बदल देते हैं

अकबर इलाहाबादी

बारे दुनिया में रहो ग़म-ज़दा या शाद रहो

ऐसा कुछ कर के चलो याँ कि बहुत याद रहो

मीर तक़ी मीर

बढ़ के तूफ़ान को आग़ोश में ले ले अपनी

डूबने वाले तिरे हाथ से साहिल तो गया

अब्दुल हमीद अदम

भँवर से लड़ो तुंद लहरों से उलझो

कहाँ तक चलोगे किनारे किनारे

रज़ा हमदानी

ढूँड उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती

ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें

seek ye pearls of faithfulness in those lost and drowned

it well could be these treasures in wastelands do abound

seek ye pearls of faithfulness in those lost and drowned

it well could be these treasures in wastelands do abound

अहमद फ़राज़

साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है लेकिन

तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है

आल-ए-अहमद सूरूर

तीर खाने की हवस है तो जिगर पैदा कर

सरफ़रोशी की तमन्ना है तो सर पैदा कर

अमीर मीनाई

शह-ज़ोर अपने ज़ोर में गिरता है मिस्ल-ए-बर्क़

वो तिफ़्ल क्या गिरेगा जो घुटनों के बल चले

मिर्ज़ा अज़ीम बेग 'अज़ीम'

शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है

जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है

बशीर बद्र

चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल

हौसला किस का बढ़ाता है कोई

शकील बदायुनी

दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम

तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे

बशीर बद्र

हर एक बात को चुप-चाप क्यूँ सुना जाए

कभी तो हौसला कर के नहीं कहा जाए

निदा फ़ाज़ली

ग़ुलामी में काम आती हैं शमशीरें तदबीरें

जो हो ज़ौक़-ए-यक़ीं पैदा तो कट जाती हैं ज़ंजीरें

अल्लामा इक़बाल

'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोली

उर्दू हिन्दी हिन्दोस्तानी

हफ़ीज़ जालंधरी

जलाने वाले जलाते ही हैं चराग़ आख़िर

ये क्या कहा कि हवा तेज़ है ज़माने की

जमील मज़हरी

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