लोकप्रिय शेर
सरल और मनपसंद शायरी का संग्रह
माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Interpretation:
Rekhta AI
वक्ता अपनी अयोग्यता स्वीकार करके विनम्रता दिखाता है, पर अपनी सच्ची चाह और लगातार प्रतीक्षा को अपने पक्ष में रखता है। वह कहता है कि मिलने की पात्रता न सही, मेरी लगन तो देखी जाए। यहाँ “दीद” केवल देखना नहीं, बल्कि निकटता और कृपा का संकेत है। भाव का केंद्र तड़प, भक्ति-सा समर्पण और आशा है।
Interpretation:
Rekhta AI
वक्ता अपनी अयोग्यता स्वीकार करके विनम्रता दिखाता है, पर अपनी सच्ची चाह और लगातार प्रतीक्षा को अपने पक्ष में रखता है। वह कहता है कि मिलने की पात्रता न सही, मेरी लगन तो देखी जाए। यहाँ “दीद” केवल देखना नहीं, बल्कि निकटता और कृपा का संकेत है। भाव का केंद्र तड़प, भक्ति-सा समर्पण और आशा है।
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टैग्ज़: इक़बाल डेऔर 3 अन्य
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
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टैग्ज़: इश्क़और 8 अन्य
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में शायर जन्नत के अस्तित्व पर एक चुलबुला कटाक्ष कर रहे हैं। उनका मानना है कि भले ही जन्नत की सच्चाई कुछ भी हो, लेकिन इंसान को खुश रहने के लिए किसी न किसी उम्मीद की ज़रूरत होती है। जन्नत का यह 'ख़याल' एक सुंदर भ्रम है जो दिल को तसल्ली देता है।
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में शायर जन्नत के अस्तित्व पर एक चुलबुला कटाक्ष कर रहे हैं। उनका मानना है कि भले ही जन्नत की सच्चाई कुछ भी हो, लेकिन इंसान को खुश रहने के लिए किसी न किसी उम्मीद की ज़रूरत होती है। जन्नत का यह 'ख़याल' एक सुंदर भ्रम है जो दिल को तसल्ली देता है।
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टैग्ज़: जन्नतऔर 4 अन्य
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
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टैग्ज़: उम्मीदऔर 5 अन्य
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
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टैग्ज़: इश्क़और 7 अन्य
हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता
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टैग्ज़: टॉप 10 रेख़्ताऔर 3 अन्य
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर आत्म-शक्ति और आत्म-निर्माण का संदेश देता है। “स्वत्व/ख़ुदी” यहाँ जागरूक, अनुशासित और साहसी व्यक्तित्व का रूपक है जो हालात के आगे हार नहीं मानता। ईश्वर का बंदे से पूछना यह दिखाता है कि सही दिशा में बढ़ा हुआ इंसान केवल भाग्य पर नहीं टिकता, वह चुनता और गढ़ता है। भावनात्मक रूप से यह विश्वास, प्रयास और जिम्मेदारी की पुकार है।
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर आत्म-शक्ति और आत्म-निर्माण का संदेश देता है। “स्वत्व/ख़ुदी” यहाँ जागरूक, अनुशासित और साहसी व्यक्तित्व का रूपक है जो हालात के आगे हार नहीं मानता। ईश्वर का बंदे से पूछना यह दिखाता है कि सही दिशा में बढ़ा हुआ इंसान केवल भाग्य पर नहीं टिकता, वह चुनता और गढ़ता है। भावनात्मक रूप से यह विश्वास, प्रयास और जिम्मेदारी की पुकार है।
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टैग्ज़: इक़बाल डेऔर 4 अन्य
इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया
वर्ना हम भी आदमी थे काम के
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में शायर यह कहना चाहता है कि इश्क़ के चक्कर में पड़कर वह अब किसी काम के नहीं रहे। वह एक दबी हुई आह के साथ याद करते हैं कि प्यार में पड़ने से पहले वो भी एक बहुत हुनरमंद और ज़रूरी इंसान थे, लेकिन अब सिर्फ़ नाम के रह गए हैं।
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में शायर यह कहना चाहता है कि इश्क़ के चक्कर में पड़कर वह अब किसी काम के नहीं रहे। वह एक दबी हुई आह के साथ याद करते हैं कि प्यार में पड़ने से पहले वो भी एक बहुत हुनरमंद और ज़रूरी इंसान थे, लेकिन अब सिर्फ़ नाम के रह गए हैं।
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टैग्ज़: इश्क़और 4 अन्य
उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है
Interpretation:
Rekhta AI
प्रिय की मौजूदगी प्रेमी के चेहरे पर पल भर की रौनक ले आती है, जबकि भीतर की पीड़ा बनी रहती है। देखने वाले इस बाहरी चमक को सेहत का संकेत समझ लेते हैं और असली दुख नहीं देख पाते। शे’र प्रेम की ‘बीमारी’ और दिखने‑वाले हाल व असली हाल के अंतर को मार्मिक ढंग से कहता है।
Interpretation:
Rekhta AI
प्रिय की मौजूदगी प्रेमी के चेहरे पर पल भर की रौनक ले आती है, जबकि भीतर की पीड़ा बनी रहती है। देखने वाले इस बाहरी चमक को सेहत का संकेत समझ लेते हैं और असली दुख नहीं देख पाते। शे’र प्रेम की ‘बीमारी’ और दिखने‑वाले हाल व असली हाल के अंतर को मार्मिक ढंग से कहता है।
हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Interpretation:
Rekhta AI
यहाँ नरगिस को आँख का रूपक माना गया है और “बे-नूरी” से आशय भीतर की रोशनी/समझ की कमी है। “चमन” समाज या दुनिया है, जहाँ सही दृष्टि रखने वाला व्यक्ति बहुत कम मिलता है। भाव यह है कि अज्ञान और अंधापन लंबे समय तक रहता है, और सच्ची दूरदृष्टि का जन्म दुर्लभ होता है।
Interpretation:
Rekhta AI
यहाँ नरगिस को आँख का रूपक माना गया है और “बे-नूरी” से आशय भीतर की रोशनी/समझ की कमी है। “चमन” समाज या दुनिया है, जहाँ सही दृष्टि रखने वाला व्यक्ति बहुत कम मिलता है। भाव यह है कि अज्ञान और अंधापन लंबे समय तक रहता है, और सच्ची दूरदृष्टि का जन्म दुर्लभ होता है।
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टैग्ज़: फ़ेमस शायरीऔर 2 अन्य
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल
कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
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टैग्ज़: क़िस्मतऔर 4 अन्य
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में प्रेम की चरम अवस्था दिखाई गई है, जहाँ जीवन और मृत्यु का भेद मिट जाता है। प्रेमी की जिंदगी का सहारा प्रिय का दर्शन है, लेकिन वही प्रिय इतना कठोर/उदासीन है कि उसी के कारण जान भी जा सकती है। एक ही चेहरा जीवन भी देता है और मृत्यु भी—यही तड़प और समर्पण का भाव है।
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में प्रेम की चरम अवस्था दिखाई गई है, जहाँ जीवन और मृत्यु का भेद मिट जाता है। प्रेमी की जिंदगी का सहारा प्रिय का दर्शन है, लेकिन वही प्रिय इतना कठोर/उदासीन है कि उसी के कारण जान भी जा सकती है। एक ही चेहरा जीवन भी देता है और मृत्यु भी—यही तड़प और समर्पण का भाव है।
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टैग्ज़: इश्क़और 4 अन्य
दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों
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टैग्ज़: अम्नऔर 5 अन्य
कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में कहने वाला बेवफ़ाई को सिर्फ़ ग़द्दारी नहीं मानता, बल्कि मानवी मजबूरी से जोड़कर देखता है। उसका ख़याल है कि अगर कोई दूर हुआ या वफ़ा न निभा सका, तो ज़रूर कुछ दबाव, हालात या लाचारी रही होगी — वरना कोई यूँ ही बेवफ़ा नहीं बन जाता। यह बात एक तरह की तसल्ली भी है और इल्ज़ाम को हल्का करने की कोशिश भी।
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में कहने वाला बेवफ़ाई को सिर्फ़ ग़द्दारी नहीं मानता, बल्कि मानवी मजबूरी से जोड़कर देखता है। उसका ख़याल है कि अगर कोई दूर हुआ या वफ़ा न निभा सका, तो ज़रूर कुछ दबाव, हालात या लाचारी रही होगी — वरना कोई यूँ ही बेवफ़ा नहीं बन जाता। यह बात एक तरह की तसल्ली भी है और इल्ज़ाम को हल्का करने की कोशिश भी।
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टैग्ज़: इश्क़और 5 अन्य
तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा
तिरे सामने आसमाँ और भी हैं
Interpretation:
Rekhta AI
बाज़ यहाँ ऊँचे हौसले और स्वतंत्र स्वभाव का प्रतीक है, जो रुककर नहीं जीता बल्कि ऊपर उठता रहता है। कवि कहता है कि संतोष करके ठहरना नहीं, आगे बढ़ते रहना चाहिए। “और भी आकाश” नए अवसरों और बड़ी मंज़िलों का रूपक है। भाव-केन्द्र में उम्मीद और निरंतर प्रयास की पुकार है।
Interpretation:
Rekhta AI
बाज़ यहाँ ऊँचे हौसले और स्वतंत्र स्वभाव का प्रतीक है, जो रुककर नहीं जीता बल्कि ऊपर उठता रहता है। कवि कहता है कि संतोष करके ठहरना नहीं, आगे बढ़ते रहना चाहिए। “और भी आकाश” नए अवसरों और बड़ी मंज़िलों का रूपक है। भाव-केन्द्र में उम्मीद और निरंतर प्रयास की पुकार है।
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टैग्ज़: इक़बाल डेऔर 2 अन्य
रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है
Interpretation:
Rekhta AI
ग़ालिब कहते हैं कि सिर्फ़ साँस लेना या ज़िंदा रहना काफ़ी नहीं है, जज़्बे में शिद्दत होनी चाहिए। जब तक इंसान का दर्द इतना गहरा न हो कि वह आँखों से लहू बनकर बहे, तब तक उस खून का कोई मतलब नहीं। यहाँ खून का मतलब गहरा इश्क़ और पीड़ा है जो दिखाई देनी चाहिए।
Interpretation:
Rekhta AI
ग़ालिब कहते हैं कि सिर्फ़ साँस लेना या ज़िंदा रहना काफ़ी नहीं है, जज़्बे में शिद्दत होनी चाहिए। जब तक इंसान का दर्द इतना गहरा न हो कि वह आँखों से लहू बनकर बहे, तब तक उस खून का कोई मतलब नहीं। यहाँ खून का मतलब गहरा इश्क़ और पीड़ा है जो दिखाई देनी चाहिए।
तुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो 'फ़राज़'
दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला
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टैग्ज़: दोस्तऔर 1 अन्य
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ
ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
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टैग्ज़: जवानीऔर 4 अन्य
सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं
Interpretation:
Rekhta AI
यह शे’र बताता है कि जो सीमा हमें आख़िरी लगती है, उसके आगे भी नई मंज़िलें होती हैं। “सितारे” यहाँ ऊँचाई और पहुँच की सीमा का संकेत हैं, और उनसे आगे बढ़ने की प्रेरणा है। दूसरी पंक्ति में प्रेम को निरंतर परीक्षा माना गया है, जिसमें हर कदम पर नया साहस और धैर्य चाहिए। भाव है—आशा के साथ आगे बढ़ते रहो, मंज़िल अभी बाकी है।
Interpretation:
Rekhta AI
यह शे’र बताता है कि जो सीमा हमें आख़िरी लगती है, उसके आगे भी नई मंज़िलें होती हैं। “सितारे” यहाँ ऊँचाई और पहुँच की सीमा का संकेत हैं, और उनसे आगे बढ़ने की प्रेरणा है। दूसरी पंक्ति में प्रेम को निरंतर परीक्षा माना गया है, जिसमें हर कदम पर नया साहस और धैर्य चाहिए। भाव है—आशा के साथ आगे बढ़ते रहो, मंज़िल अभी बाकी है।
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टैग्ज़: इक़बाल डेऔर 3 अन्य
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर मनुष्य की न खत्म होने वाली चाहत और अतृप्ति को दिखाता है। “दम निकलना” एक रूपक है, जो बताता है कि इच्छा की तीव्रता इंसान को भीतर तक थका देती है। फिर भी, जब कई अरमान पूरे हो जाते हैं, तब भी संतोष नहीं मिलता, क्योंकि दिल की माँगें लगातार बढ़ती रहती हैं।
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर मनुष्य की न खत्म होने वाली चाहत और अतृप्ति को दिखाता है। “दम निकलना” एक रूपक है, जो बताता है कि इच्छा की तीव्रता इंसान को भीतर तक थका देती है। फिर भी, जब कई अरमान पूरे हो जाते हैं, तब भी संतोष नहीं मिलता, क्योंकि दिल की माँगें लगातार बढ़ती रहती हैं।
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टैग्ज़: आरज़ूऔर 6 अन्य
इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब'
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने
Interpretation:
Rekhta AI
इस शे’र में इश्क़ को ऐसी आग बताया गया है जो इंसान की मरज़ी से नहीं चलती। न आप इसे अपने हिसाब से जगा सकते हैं, न जगे हुए इश्क़ को आसानी से बुझा सकते हैं। भाव यह है कि प्यार भीतर से जलाता है और आदमी को बेबस कर देता है।
Interpretation:
Rekhta AI
इस शे’र में इश्क़ को ऐसी आग बताया गया है जो इंसान की मरज़ी से नहीं चलती। न आप इसे अपने हिसाब से जगा सकते हैं, न जगे हुए इश्क़ को आसानी से बुझा सकते हैं। भाव यह है कि प्यार भीतर से जलाता है और आदमी को बेबस कर देता है।
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टैग्ज़: इश्क़और 4 अन्य
अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी
तू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर कहता है कि जीवन का अर्थ बाहर नहीं, अपने भीतर झाँकने से मिलता है। “डूबना” अपने मन की गहराई में उतरने का रूपक है, जहाँ असली पहचान और दिशा मिलती है। दूसरे मिसरे में संदेश है कि किसी के पीछे चलने से बेहतर है खुद का होना—स्वतंत्र और जागरूक। भाव आत्मजागरण और स्वत्व का है।
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर कहता है कि जीवन का अर्थ बाहर नहीं, अपने भीतर झाँकने से मिलता है। “डूबना” अपने मन की गहराई में उतरने का रूपक है, जहाँ असली पहचान और दिशा मिलती है। दूसरे मिसरे में संदेश है कि किसी के पीछे चलने से बेहतर है खुद का होना—स्वतंत्र और जागरूक। भाव आत्मजागरण और स्वत्व का है।
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टैग्ज़: आगहीऔर 1 अन्य
हम ने माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन
ख़ाक हो जाएँगे हम तुम को ख़बर होते तक
Interpretation:
Rekhta AI
मिर्ज़ा ग़ालिब यहाँ कह रहे हैं कि उपेक्षा भले ही एक दिन खत्म हो जाए, पर वह खत्म होते-होते बहुत देर हो जाती है। “मिट्टी/धूल हो जाना” मृत्यु, समाप्त हो जाना या पूरी तरह टूट जाना का संकेत है। भाव यह है कि प्रेम में पहचान और ध्यान अगर देर से मिले, तो उसका कोई अर्थ नहीं रह जाता। इसी देर और बेबसी की टीस इस शेर का केंद्र है।
Interpretation:
Rekhta AI
मिर्ज़ा ग़ालिब यहाँ कह रहे हैं कि उपेक्षा भले ही एक दिन खत्म हो जाए, पर वह खत्म होते-होते बहुत देर हो जाती है। “मिट्टी/धूल हो जाना” मृत्यु, समाप्त हो जाना या पूरी तरह टूट जाना का संकेत है। भाव यह है कि प्रेम में पहचान और ध्यान अगर देर से मिले, तो उसका कोई अर्थ नहीं रह जाता। इसी देर और बेबसी की टीस इस शेर का केंद्र है।
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टैग्ज़: तग़ाफ़ुलऔर 1 अन्य
ज़ाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर
या वो जगह बता दे जहाँ पर ख़ुदा न हो
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टैग्ज़: फ़ेमस शायरीऔर 2 अन्य
रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं
Interpretation:
Rekhta AI
मिर्ज़ा ग़ालिब यहाँ दुख को मन की आदत से जोड़ते हैं: बार-बार कष्ट सहने से मन मजबूत हो जाता है। लगातार कठिनाइयाँ मिलने पर उनका डर और तीखापन कम हो जाता है, क्योंकि इंसान उन्हें झेलना सीख लेता है। भाव यह है कि तकलीफ़ भी समय के साथ सहने लायक बन जाती है।
Interpretation:
Rekhta AI
मिर्ज़ा ग़ालिब यहाँ दुख को मन की आदत से जोड़ते हैं: बार-बार कष्ट सहने से मन मजबूत हो जाता है। लगातार कठिनाइयाँ मिलने पर उनका डर और तीखापन कम हो जाता है, क्योंकि इंसान उन्हें झेलना सीख लेता है। भाव यह है कि तकलीफ़ भी समय के साथ सहने लायक बन जाती है।
हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर 'ताल्ली' यानी ख़ुद की तारीफ़ का एक बेहतरीन उदाहरण है। शायर मानता है कि दुनिया में और भी अच्छे कवि हैं, लेकिन साथ ही यह दावा करता है कि उसकी शैली या अंदाज़-ए-बयाँ बाकियों से बिल्कुल हटकर है, जो उसे सबसे ख़ास बनाता है।
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर 'ताल्ली' यानी ख़ुद की तारीफ़ का एक बेहतरीन उदाहरण है। शायर मानता है कि दुनिया में और भी अच्छे कवि हैं, लेकिन साथ ही यह दावा करता है कि उसकी शैली या अंदाज़-ए-बयाँ बाकियों से बिल्कुल हटकर है, जो उसे सबसे ख़ास बनाता है।
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टैग: तअल्ली
सुब्ह होती है शाम होती है
उम्र यूँही तमाम होती है
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टैग्ज़: फ़ेमस शायरीऔर 2 अन्य
जी ढूँडता है फिर वही फ़ुर्सत कि रात दिन
बैठे रहें तसव्वुर-ए-जानाँ किए हुए
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर उस इच्छा को दिखाता है जिसमें इंसान दुनिया की भागदौड़ से निकलकर बस समय पाना चाहता है। “दिन-रात” बताता है कि यह चाह लगातार है, थोड़ी देर की नहीं। “प्रियतम का कल्पना-चित्र” मन का सहारा है, जिसमें डूबकर बैठना भी सुकून बन जाता है। भाव का केंद्र एकांत में याद और तड़प के साथ जुड़ी मीठी डूबन है।
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर उस इच्छा को दिखाता है जिसमें इंसान दुनिया की भागदौड़ से निकलकर बस समय पाना चाहता है। “दिन-रात” बताता है कि यह चाह लगातार है, थोड़ी देर की नहीं। “प्रियतम का कल्पना-चित्र” मन का सहारा है, जिसमें डूबकर बैठना भी सुकून बन जाता है। भाव का केंद्र एकांत में याद और तड़प के साथ जुड़ी मीठी डूबन है।
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टैग्ज़: तसव्वुरऔर 2 अन्य
बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं
Interpretation:
Rekhta AI
कवि कहता है कि अनुभव के कारण वह आने वाली बात को पहले ही भांप लेता है। “कदमों की आहट” ज़िंदगी के दुख-सुख, उसकी जिम्मेदारियाँ और बार-बार लौटने वाले हालात का संकेत है। ज़िंदगी से सीधे बात करके वह जताता है कि अब उसे कोई भ्रम नहीं रहता। भाव में थकान, समझ और स्वीकार का मेल है।
Interpretation:
Rekhta AI
कवि कहता है कि अनुभव के कारण वह आने वाली बात को पहले ही भांप लेता है। “कदमों की आहट” ज़िंदगी के दुख-सुख, उसकी जिम्मेदारियाँ और बार-बार लौटने वाले हालात का संकेत है। ज़िंदगी से सीधे बात करके वह जताता है कि अब उसे कोई भ्रम नहीं रहता। भाव में थकान, समझ और स्वीकार का मेल है।
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टैग्ज़: आहटऔर 3 अन्य
तुम्हारा दिल मिरे दिल के बराबर हो नहीं सकता
वो शीशा हो नहीं सकता ये पत्थर हो नहीं सकता
Interpretation:
Rekhta AI
दाग़ देहलवी ने दो दिलों के स्वभाव को “काँच” और “पत्थर” से तुलना करके दिखाया है। कहने वाला मानता है कि दोनों के भीतर की संवेदना एक जैसी नहीं, इसलिए बराबरी संभव नहीं। एक दिल बहुत कोमल है और जल्दी आहत होता है, दूसरा कठोर और ठंडा है। इसमें प्रेम में असंगति और शिकायत का दर्द है।
Interpretation:
Rekhta AI
दाग़ देहलवी ने दो दिलों के स्वभाव को “काँच” और “पत्थर” से तुलना करके दिखाया है। कहने वाला मानता है कि दोनों के भीतर की संवेदना एक जैसी नहीं, इसलिए बराबरी संभव नहीं। एक दिल बहुत कोमल है और जल्दी आहत होता है, दूसरा कठोर और ठंडा है। इसमें प्रेम में असंगति और शिकायत का दर्द है।
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टैग: दिल
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है
क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
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टैग्ज़: ज़िंदगीऔर 1 अन्य
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है
Interpretation:
Rekhta AI
शायर अपनी ही नादानी पर व्यंग्य कर रहे हैं कि हम ऐसे इंसान से वफ़ा की उम्मीद लगाए बैठे हैं जो 'वफ़ा' शब्द के अर्थ से ही अनजान है। यह प्रेमी की लाचारी और प्रेम की विडंबना को दर्शाता है कि उनकी आशा एक ऐसे व्यक्ति से है जो उसे पूरा करने के योग्य ही नहीं।
Interpretation:
Rekhta AI
शायर अपनी ही नादानी पर व्यंग्य कर रहे हैं कि हम ऐसे इंसान से वफ़ा की उम्मीद लगाए बैठे हैं जो 'वफ़ा' शब्द के अर्थ से ही अनजान है। यह प्रेमी की लाचारी और प्रेम की विडंबना को दर्शाता है कि उनकी आशा एक ऐसे व्यक्ति से है जो उसे पूरा करने के योग्य ही नहीं।
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टैग्ज़: उम्मीदऔर 3 अन्य
ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में ग़ालिब उन दोस्तों से शिकायत करते हैं जो दर्द में मदद करने के बजाय उपदेश देने लगते हैं। “नासेह” यानी समझाने वाला दोस्त यहाँ अपनापन नहीं, बल्कि जज करने का भाव लाता है। कवि चाहता है कि दोस्त या तो समस्या का हल करें या कम से कम दुख बाँटें। भाव यह है कि बिना संवेदना की नसीहत दोस्ती को बेकार कर देती है।
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में ग़ालिब उन दोस्तों से शिकायत करते हैं जो दर्द में मदद करने के बजाय उपदेश देने लगते हैं। “नासेह” यानी समझाने वाला दोस्त यहाँ अपनापन नहीं, बल्कि जज करने का भाव लाता है। कवि चाहता है कि दोस्त या तो समस्या का हल करें या कम से कम दुख बाँटें। भाव यह है कि बिना संवेदना की नसीहत दोस्ती को बेकार कर देती है।
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टैग्ज़: दोस्तऔर 1 अन्य
तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो
तुम को देखें कि तुम से बात करें
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर पास बैठे प्रिय की मौजूदगी में पैदा हुई मीठी झिझक को दिखाता है। देखने का सुख इतना गहरा है कि बोलने की हिम्मत रुक-रुक जाती है। मन में चाह भी है कि बात हो, और डर भी कि बोलते ही वह नाज़ुक सा पल टूट न जाए। इसी दुविधा में प्रेम की तीव्रता झलकती है।
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर पास बैठे प्रिय की मौजूदगी में पैदा हुई मीठी झिझक को दिखाता है। देखने का सुख इतना गहरा है कि बोलने की हिम्मत रुक-रुक जाती है। मन में चाह भी है कि बात हो, और डर भी कि बोलते ही वह नाज़ुक सा पल टूट न जाए। इसी दुविधा में प्रेम की तीव्रता झलकती है।
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टैग्ज़: फ़ेमस शायरीऔर 2 अन्य
रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं हो 'ग़ालिब'
कहते हैं अगले ज़माने में कोई 'मीर' भी था
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में ग़ालिब ने बहुत ही विनम्रता से महान शायर मीर तक़ी 'मीर' की बड़ाई की है। वे खुद को समझाते हुए कहते हैं कि भले ही आज मैं उस्ताद हूँ, लेकिन मुझसे पहले भी एक ऐसा शायर था जिसे ज़माना 'मीर' कहता था। यह शेर अपने से बड़ों का सम्मान करने और अपनी कला पर घमंड न करने की सीख देता है।
Interpretation:
Rekhta AI
इस शेर में ग़ालिब ने बहुत ही विनम्रता से महान शायर मीर तक़ी 'मीर' की बड़ाई की है। वे खुद को समझाते हुए कहते हैं कि भले ही आज मैं उस्ताद हूँ, लेकिन मुझसे पहले भी एक ऐसा शायर था जिसे ज़माना 'मीर' कहता था। यह शेर अपने से बड़ों का सम्मान करने और अपनी कला पर घमंड न करने की सीख देता है।
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टैग्ज़: मीर तक़ी मीरऔर 1 अन्य
अंदाज़ अपना देखते हैं आइने में वो
और ये भी देखते हैं कोई देखता न हो
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टैग्ज़: अदाऔर 1 अन्य
कोई समझे तो एक बात कहूँ
इश्क़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहीं
Interpretation:
Rekhta AI
कवि कहता है कि यह बात हर किसी को नहीं समझ आती, इसलिए वह केवल समझदार से बोलता है। वह प्रेम को दोष और पाप मानने के बजाय उसे ‘तौफ़ीक़’ यानी ऊपर से मिली शक्ति/कृपा बताता है। इस तरह प्रेम पर लगने वाले नैतिक आरोपों को वह पलट देता है और उसे ऊँचा, पवित्र अनुभव बनाता है। भाव यह है कि प्रेम को दंड नहीं, आदर मिलना चाहिए।
Interpretation:
Rekhta AI
कवि कहता है कि यह बात हर किसी को नहीं समझ आती, इसलिए वह केवल समझदार से बोलता है। वह प्रेम को दोष और पाप मानने के बजाय उसे ‘तौफ़ीक़’ यानी ऊपर से मिली शक्ति/कृपा बताता है। इस तरह प्रेम पर लगने वाले नैतिक आरोपों को वह पलट देता है और उसे ऊँचा, पवित्र अनुभव बनाता है। भाव यह है कि प्रेम को दंड नहीं, आदर मिलना चाहिए।
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टैग्ज़: इश्क़और 4 अन्य
दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के
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टैग्ज़: इश्क़और 2 अन्य
मकतब-ए-इश्क़ का दस्तूर निराला देखा
उस को छुट्टी न मिले जिस को सबक़ याद रहे
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टैग्ज़: इश्क़और 3 अन्य
तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ
मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
Interpretation:
Rekhta AI
यहाँ बोलने वाला प्रेम का थोड़ा-सा नहीं, उसका चरम चाहता है। दूसरी पंक्ति में वह अपनी ही चाह की बड़ी माँग को ‘भोलेपन’ कहकर मान लेता है। “अंत” या “सीमा” पूर्णता और पूरी तरह समर्पित होने का संकेत है, और “भोलेपन” में हल्की-सी आत्म-विडंबना भी है। भाव-केन्द्र ललक, भक्ति और विनम्रता है।
Interpretation:
Rekhta AI
यहाँ बोलने वाला प्रेम का थोड़ा-सा नहीं, उसका चरम चाहता है। दूसरी पंक्ति में वह अपनी ही चाह की बड़ी माँग को ‘भोलेपन’ कहकर मान लेता है। “अंत” या “सीमा” पूर्णता और पूरी तरह समर्पित होने का संकेत है, और “भोलेपन” में हल्की-सी आत्म-विडंबना भी है। भाव-केन्द्र ललक, भक्ति और विनम्रता है।
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टैग्ज़: इक़बाल डेऔर 5 अन्य
'ज़फ़र' आदमी उस को न जानिएगा वो हो कैसा ही साहब-ए-फ़हम-ओ-ज़का
जिसे ऐश में याद-ए-ख़ुदा न रही जिसे तैश में ख़ौफ़-ए-ख़ुदा न रहा
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इस शेर में इंसान की कसौटी बुद्धि नहीं, बल्कि आचरण और ईश्वर-चेतना है। सुख में ईश्वर की याद कृतज्ञता और विनम्रता दिखाती है, और गुस्से में ईश्वर का डर संयम और न्याय बनाए रखता है। जो दोनों हालात में यह भूल जाए, उसकी समझ व्यर्थ और उसका चरित्र कमज़ोर हो जाता है।
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इस शेर में इंसान की कसौटी बुद्धि नहीं, बल्कि आचरण और ईश्वर-चेतना है। सुख में ईश्वर की याद कृतज्ञता और विनम्रता दिखाती है, और गुस्से में ईश्वर का डर संयम और न्याय बनाए रखता है। जो दोनों हालात में यह भूल जाए, उसकी समझ व्यर्थ और उसका चरित्र कमज़ोर हो जाता है।
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टैग्ज़: आदमीऔर 1 अन्य
दिल के फफूले जल उठे सीने के दाग़ से
इस घर को आग लग गई घर के चराग़ से
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टैग्ज़: चराग़और 4 अन्य
यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं
मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे
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टैग्ज़: आदमीऔर 2 अन्य
नशा पिला के गिराना तो सब को आता है
मज़ा तो जब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी
Interpretation:
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यह शेर आसान नुकसान पहुँचाने और मुश्किल मदद करने का फर्क दिखाता है। ‘नशा’ यहाँ किसी भी ऐसे लालच या असर का रूपक है जो इंसान को कमज़ोर कर दे, और ‘साक़ी’ उस व्यक्ति का प्रतीक है जिसके हाथ में देना या रोकना है। कवि कहता है गिराना तो आम है, असली महानता गिरते को सहारा देकर बचाने में है।
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यह शेर आसान नुकसान पहुँचाने और मुश्किल मदद करने का फर्क दिखाता है। ‘नशा’ यहाँ किसी भी ऐसे लालच या असर का रूपक है जो इंसान को कमज़ोर कर दे, और ‘साक़ी’ उस व्यक्ति का प्रतीक है जिसके हाथ में देना या रोकना है। कवि कहता है गिराना तो आम है, असली महानता गिरते को सहारा देकर बचाने में है।
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