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Dagh Dehlvi's Photo'

दाग़ देहलवी

1831 - 1905 | दिल्ली, भारत

उर्दू के सबसे लोकप्रिय शायरों में शामिल। शायरी में चुस्ती , शोख़ी और मुहावरों के इस्तेमाल के लिए प्रसिद्ध

उर्दू के सबसे लोकप्रिय शायरों में शामिल। शायरी में चुस्ती , शोख़ी और मुहावरों के इस्तेमाल के लिए प्रसिद्ध

दाग़ देहलवी की टॉप 20 शायरी

हज़ारों काम मोहब्बत में हैं मज़े के 'दाग़'

जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर एक मज़ेदार विरोधाभास रखता है: प्रेम में कई तरह की मीठी व्यस्तताएँ हैं, फिर भी सबसे बड़ा कमाल “कुछ करना” है। “कुछ करना” का मतलब है बिना ज़ोर लगाए, धैर्य से, भीतर ही भीतर प्रेम में डूबे रहना। भाव यह है कि सच्ची लगन कई बार चुपचाप ठहरने में दिखती है।

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर एक मज़ेदार विरोधाभास रखता है: प्रेम में कई तरह की मीठी व्यस्तताएँ हैं, फिर भी सबसे बड़ा कमाल “कुछ करना” है। “कुछ करना” का मतलब है बिना ज़ोर लगाए, धैर्य से, भीतर ही भीतर प्रेम में डूबे रहना। भाव यह है कि सच्ची लगन कई बार चुपचाप ठहरने में दिखती है।

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे

तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर पुराने वादों को सामने रखकर आज की बेरुख़ी पर सवाल करता है। पहली पंक्ति में साथ निभाने और बात मानने की कसमें हैं, और दूसरी में तंज भरा याद दिलाना। भाव यह है कि जो वचन दिए गए थे, वही अब टूटते दिख रहे हैं, इसलिए याद को गवाही बनाया गया है।

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर पुराने वादों को सामने रखकर आज की बेरुख़ी पर सवाल करता है। पहली पंक्ति में साथ निभाने और बात मानने की कसमें हैं, और दूसरी में तंज भरा याद दिलाना। भाव यह है कि जो वचन दिए गए थे, वही अब टूटते दिख रहे हैं, इसलिए याद को गवाही बनाया गया है।

मिलाते हो उसी को ख़ाक में जो दिल से मिलता है

मिरी जाँ चाहने वाला बड़ी मुश्किल से मिलता है

Interpretation: Rekhta AI

कवि का दर्द यह है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से नज़दीक आता है, उसी को अपमानित करके कुचल दिया जाता है। “मिट्टी में मिलाना” यहाँ बेइज़्ज़ती और बरबादी का संकेत है। दूसरी पंक्ति बताती है कि ऐसा सच्चा चाहने वाला वैसे ही बहुत कम मिलता है, इसलिए उसकी कदर करना बड़ा नुकसान है। भाव में शिकायत और पछतावा दोनों हैं।

Interpretation: Rekhta AI

कवि का दर्द यह है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से नज़दीक आता है, उसी को अपमानित करके कुचल दिया जाता है। “मिट्टी में मिलाना” यहाँ बेइज़्ज़ती और बरबादी का संकेत है। दूसरी पंक्ति बताती है कि ऐसा सच्चा चाहने वाला वैसे ही बहुत कम मिलता है, इसलिए उसकी कदर करना बड़ा नुकसान है। भाव में शिकायत और पछतावा दोनों हैं।

उर्दू है जिस का नाम हमीं जानते हैं 'दाग़'

हिन्दोस्ताँ में धूम हमारी ज़बाँ की है

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर उर्दू पर गर्व और अपनी पहचान का एलान है। कवि अपने को उर्दू का सच्चा जानकार बताता है और कहता है कि इस भाषा की गूंज हर जगह है। “धूम” यहाँ लोगों में फैली लोकप्रियता और सराहना का संकेत है। भाव आत्मविश्वास और भाषा के उत्सव का है।

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर उर्दू पर गर्व और अपनी पहचान का एलान है। कवि अपने को उर्दू का सच्चा जानकार बताता है और कहता है कि इस भाषा की गूंज हर जगह है। “धूम” यहाँ लोगों में फैली लोकप्रियता और सराहना का संकेत है। भाव आत्मविश्वास और भाषा के उत्सव का है।

सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं

हम देखने वालों की नज़र देख रहे हैं

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर बताता है कि वक्ता की दिलचस्पी सिर्फ़ महबूब में नहीं, बल्कि लोगों की निगाहों में भी है। भीड़ तो महबूब को देख रही है, पर वक्ता उन नज़रों में छुपी चाह, जलन और खिंचाव को पकड़ता है। इससे महबूब की कशिश के साथ-साथ मुकाबले का एहसास भी उभरता है। भाव में सतर्कता और हल्की-सी ईर्ष्या झलकती है।

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर बताता है कि वक्ता की दिलचस्पी सिर्फ़ महबूब में नहीं, बल्कि लोगों की निगाहों में भी है। भीड़ तो महबूब को देख रही है, पर वक्ता उन नज़रों में छुपी चाह, जलन और खिंचाव को पकड़ता है। इससे महबूब की कशिश के साथ-साथ मुकाबले का एहसास भी उभरता है। भाव में सतर्कता और हल्की-सी ईर्ष्या झलकती है।

हमें है शौक़ कि बे-पर्दा तुम को देखेंगे

तुम्हें है शर्म तो आँखों पे हाथ धर लेना

Interpretation: Rekhta AI

यह दोहा-सा शेर छेड़छाड़ और नज़ाकत से भरा है: प्रेमी खुले रूप में दर्शन चाहता है और लज्जा को मज़ाकिया ढंग से पलट देता है। वह कहता है कि अगर शर्म है तो चेहरा नहीं, अपनी नजर ढक लो। भाव में चाह, नटखटपन और निकटता की चाहत एक साथ दिखती है।

Interpretation: Rekhta AI

यह दोहा-सा शेर छेड़छाड़ और नज़ाकत से भरा है: प्रेमी खुले रूप में दर्शन चाहता है और लज्जा को मज़ाकिया ढंग से पलट देता है। वह कहता है कि अगर शर्म है तो चेहरा नहीं, अपनी नजर ढक लो। भाव में चाह, नटखटपन और निकटता की चाहत एक साथ दिखती है।

ख़ूब पर्दा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं

साफ़ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं

Interpretation: Rekhta AI

दाग़ देहलवी यहाँ प्रिय के नख़रे और संकोच को ‘परदे’ के रूपक से दिखाते हैं। परदे के पास बैठना बताता है कि वह बहुत पास होकर भी दूरी बनाए हुए है—इतना कि झलक मिलती रहे, पर मिलन हो। इसी आधी-सी मौजूदगी से चाहत बढ़ती है और मन बेचैन रहता है।

Interpretation: Rekhta AI

दाग़ देहलवी यहाँ प्रिय के नख़रे और संकोच को ‘परदे’ के रूपक से दिखाते हैं। परदे के पास बैठना बताता है कि वह बहुत पास होकर भी दूरी बनाए हुए है—इतना कि झलक मिलती रहे, पर मिलन हो। इसी आधी-सी मौजूदगी से चाहत बढ़ती है और मन बेचैन रहता है।

शब-ए-विसाल है गुल कर दो इन चराग़ों को

ख़ुशी की बज़्म में क्या काम जलने वालों का

EXPLANATION #1

यह मिलन की रात है, इन दीयों को बुझा दो।

ख़ुशी की महफ़िल में तड़पते-जलते लोगों का क्या काम है?

कवि कहता है कि मिलन की रात में दीपक बुझा दो, क्योंकि उस घड़ी में उजाले से ज़्यादा निकटता और एकांत चाहिए। “जलने वाले” उन प्रेमियों का रूपक हैं जो विरह की आग में तड़पते हैं। आनंद की सभा में उनका दर्द बेमेल लगता है, इसलिए शेर में व्यंग्य के साथ अलग-थलग पड़ने का भाव भी है।

शफ़क़ सुपुरी

EXPLANATION #1

यह मिलन की रात है, इन दीयों को बुझा दो।

ख़ुशी की महफ़िल में तड़पते-जलते लोगों का क्या काम है?

कवि कहता है कि मिलन की रात में दीपक बुझा दो, क्योंकि उस घड़ी में उजाले से ज़्यादा निकटता और एकांत चाहिए। “जलने वाले” उन प्रेमियों का रूपक हैं जो विरह की आग में तड़पते हैं। आनंद की सभा में उनका दर्द बेमेल लगता है, इसलिए शेर में व्यंग्य के साथ अलग-थलग पड़ने का भाव भी है।

शफ़क़ सुपुरी

आशिक़ी से मिलेगा ज़ाहिद

बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर प्रेम और रूखी धार्मिकता के बीच फर्क दिखाता है। कवि ज़ाहिद से कहता है कि सिर्फ नियमों वाली पूजा-पाठ पर्याप्त नहीं, अगर दिल में सच्ची लगन हो। ईश्वर तक पहुँचने का असल रास्ता भीतर की गर्माहट, प्रेम और समर्पण है।

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर प्रेम और रूखी धार्मिकता के बीच फर्क दिखाता है। कवि ज़ाहिद से कहता है कि सिर्फ नियमों वाली पूजा-पाठ पर्याप्त नहीं, अगर दिल में सच्ची लगन हो। ईश्वर तक पहुँचने का असल रास्ता भीतर की गर्माहट, प्रेम और समर्पण है।

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया

तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर अपने ही भरोसे पर पछतावा और आत्म-तिरस्कार दिखाता है। वादा पूरा होने से इंतज़ार इतना भारी और लंबा लगता है कि उसे “क़यामत” जैसा कहा गया है। यहाँ क़यामत अंत-काल नहीं, बल्कि मन की घबराहट, टूटन और निराशा का रूपक है।

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर अपने ही भरोसे पर पछतावा और आत्म-तिरस्कार दिखाता है। वादा पूरा होने से इंतज़ार इतना भारी और लंबा लगता है कि उसे “क़यामत” जैसा कहा गया है। यहाँ क़यामत अंत-काल नहीं, बल्कि मन की घबराहट, टूटन और निराशा का रूपक है।

लिपट जाते हैं वो बिजली के डर से

इलाही ये घटा दो दिन तो बरसे

Interpretation: Rekhta AI

कवि बारिश-तूफान को पास आने का अवसर बना देता है: बिजली से घबराकर प्रिय चिपक जाता है और प्रेमी को नज़दीकी मिलती है। इसलिए वह प्रार्थना करता है कि बादल कुछ दिन और बरसें, ताकि यह बहाना बना रहे। घटा और बिजली प्रकृति के सहारे प्रेम, डर और मिलन की चाह को दिखाते हैं।

Interpretation: Rekhta AI

कवि बारिश-तूफान को पास आने का अवसर बना देता है: बिजली से घबराकर प्रिय चिपक जाता है और प्रेमी को नज़दीकी मिलती है। इसलिए वह प्रार्थना करता है कि बादल कुछ दिन और बरसें, ताकि यह बहाना बना रहे। घटा और बिजली प्रकृति के सहारे प्रेम, डर और मिलन की चाह को दिखाते हैं।

जिस में लाखों बरस की हूरें हों

ऐसी जन्नत को क्या करे कोई

Interpretation: Rekhta AI

दाग़ देहलवी स्वर्ग की आम कल्पना—हूरें और अनंत सुख—को तुच्छ बताते हैं। दूसरा मिसरा सवाल के रूप में इनकार है: जब दिल की असली चाह (महबूब/सच्चा सुकून) मिले, तो स्वर्ग भी बेकार है। शेर प्रेम की तीव्रता और बाहरी लालच से उदासीनता दिखाता है।

Interpretation: Rekhta AI

दाग़ देहलवी स्वर्ग की आम कल्पना—हूरें और अनंत सुख—को तुच्छ बताते हैं। दूसरा मिसरा सवाल के रूप में इनकार है: जब दिल की असली चाह (महबूब/सच्चा सुकून) मिले, तो स्वर्ग भी बेकार है। शेर प्रेम की तीव्रता और बाहरी लालच से उदासीनता दिखाता है।

रुख़-ए-रौशन के आगे शम्अ रख कर वो ये कहते हैं

उधर जाता है देखें या इधर परवाना आता है

Interpretation: Rekhta AI

प्रिय अपने चेहरे की चमक के सामने दीपक रखकर प्रेमी की परीक्षा करता है। दीपक दूसरी आकर्षक रोशनी का प्रतीक है और पतंगा उस प्रेमी का, जो रोशनी और आग की ओर खिंचता चला आता है। इस छेड़छाड़ में नाज़ के साथ हल्की-सी ईर्ष्या भी है—दिल आखिर किसे चुनेगा। शेर आकर्षण, दुविधा और बेबस प्रेम को दिखाता है।

Interpretation: Rekhta AI

प्रिय अपने चेहरे की चमक के सामने दीपक रखकर प्रेमी की परीक्षा करता है। दीपक दूसरी आकर्षक रोशनी का प्रतीक है और पतंगा उस प्रेमी का, जो रोशनी और आग की ओर खिंचता चला आता है। इस छेड़छाड़ में नाज़ के साथ हल्की-सी ईर्ष्या भी है—दिल आखिर किसे चुनेगा। शेर आकर्षण, दुविधा और बेबस प्रेम को दिखाता है।

दी शब-ए-वस्ल मोअज़्ज़िन ने अज़ाँ पिछली रात

हाए कम-बख़्त को किस वक़्त ख़ुदा याद आया

Interpretation: Rekhta AI

यहाँ दाग़ देहलवी ने व्यंग्य और तड़प के साथ बताया है कि मिलन के पल में अज़ान एक बाधा बन जाती है। प्रेमी मोअज़्ज़िन की भक्ति का विरोध नहीं करता, पर उसे दुख है कि यह आवाज़ ठीक उसी समय गई। चाहत के उफान में धार्मिक पुकार भी बदकिस्मती जैसी लगती है। शेर प्रेम और नियम/धर्म के टकराव को उभारता है।

Interpretation: Rekhta AI

यहाँ दाग़ देहलवी ने व्यंग्य और तड़प के साथ बताया है कि मिलन के पल में अज़ान एक बाधा बन जाती है। प्रेमी मोअज़्ज़िन की भक्ति का विरोध नहीं करता, पर उसे दुख है कि यह आवाज़ ठीक उसी समय गई। चाहत के उफान में धार्मिक पुकार भी बदकिस्मती जैसी लगती है। शेर प्रेम और नियम/धर्म के टकराव को उभारता है।

दिल ले के मुफ़्त कहते हैं कुछ काम का नहीं

उल्टी शिकायतें हुईं एहसान तो गया

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर प्रेम में मिली कृतघ्नता का दर्द दिखाता है: दिल जैसी बड़ी भेंट भी सामने वाला बेकार बता देता है। “उलटी शिकायतें” बताती हैं कि जिसने दिया वही दोषी ठहरा दिया गया। भाव में तीखा व्यंग्य, अपमान और भरोसे के टूटने की पीड़ा है।

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर प्रेम में मिली कृतघ्नता का दर्द दिखाता है: दिल जैसी बड़ी भेंट भी सामने वाला बेकार बता देता है। “उलटी शिकायतें” बताती हैं कि जिसने दिया वही दोषी ठहरा दिया गया। भाव में तीखा व्यंग्य, अपमान और भरोसे के टूटने की पीड़ा है।

चुप-चाप सुनती रहती है पहरों शब-ए-फ़िराक़

तस्वीर-ए-यार को है मिरी गुफ़्तुगू पसंद

Interpretation: Rekhta AI

कवि जुदाई की रात में अकेला है और एक तस्वीर से बातें कर रहा है, मानो वह सजीव हो। “रात” को चुप श्रोता और “तस्वीर” को साथी बनाकर वह अपनी तड़प और खालीपन दिखाता है। प्रिय के होने पर याद और कल्पना ही उसके संवाद का सहारा बन जाती है।

Interpretation: Rekhta AI

कवि जुदाई की रात में अकेला है और एक तस्वीर से बातें कर रहा है, मानो वह सजीव हो। “रात” को चुप श्रोता और “तस्वीर” को साथी बनाकर वह अपनी तड़प और खालीपन दिखाता है। प्रिय के होने पर याद और कल्पना ही उसके संवाद का सहारा बन जाती है।

रहा दिल में वो बेदर्द और दर्द रहा

मुक़ीम कौन हुआ है मक़ाम किस का था

Interpretation: Rekhta AI

इस शेर में प्रिय के चले जाने और दर्द के रह जाने की बात है: इंसान चला जाता है, पर पीड़ा मन में बनी रहती है। दूसरी पंक्ति उस निजी दुख को एक बड़े सच में बदल देती है कि दिल किसी का स्थायी ठिकाना है, दुनिया—सब कुछ अस्थायी है। “मक़ाम” यहाँ दिल और जीवन, दोनों का रूपक बन जाता है।

Interpretation: Rekhta AI

इस शेर में प्रिय के चले जाने और दर्द के रह जाने की बात है: इंसान चला जाता है, पर पीड़ा मन में बनी रहती है। दूसरी पंक्ति उस निजी दुख को एक बड़े सच में बदल देती है कि दिल किसी का स्थायी ठिकाना है, दुनिया—सब कुछ अस्थायी है। “मक़ाम” यहाँ दिल और जीवन, दोनों का रूपक बन जाता है।

यूँ भी हज़ारों लाखों में तुम इंतिख़ाब हो

पूरा करो सवाल तो फिर ला-जवाब हो

Interpretation: Rekhta AI

इस शेर में दाग़ देहलवी प्रिय की खासियत बताते हैं कि भीड़ में भी वही चुना हुआ है। फिर प्रेमी हल्की-सी शरारत के साथ कहता है कि अगर मेरी बात मान लो तो तुम सचमुच बेमिसाल ठहरोगे। यह प्रशंसा और मनुहार का मिला-जुला अंदाज़ है। भावनात्मक केंद्र चाहत है, जो तारीफ़ बनकर सामने आती है।

Interpretation: Rekhta AI

इस शेर में दाग़ देहलवी प्रिय की खासियत बताते हैं कि भीड़ में भी वही चुना हुआ है। फिर प्रेमी हल्की-सी शरारत के साथ कहता है कि अगर मेरी बात मान लो तो तुम सचमुच बेमिसाल ठहरोगे। यह प्रशंसा और मनुहार का मिला-जुला अंदाज़ है। भावनात्मक केंद्र चाहत है, जो तारीफ़ बनकर सामने आती है।

फ़लक देता है जिन को 'ऐश उन को ग़म भी होते हैं

जहाँ बजते हैं नक़्क़ारे वहाँ मातम भी होते है

Interpretation: Rekhta AI

दाग़ देहलवी इस दोहे में बताते हैं कि जीवन में सुख और दुख साथ-साथ चलते हैं। “फ़लक” यानी किस्मत—वह आनंद देती है तो पीड़ा भी देती है। “नक़्क़ारे” (जश्न के बाजे) और “मातम” (शोक) का विरोध दिखाकर कहा गया है कि उत्सव के बीच भी दुख मौजूद रहता है। भाव यह है कि खुशियों में विनम्र रहो और दुख में धैर्य रखो।

Interpretation: Rekhta AI

दाग़ देहलवी इस दोहे में बताते हैं कि जीवन में सुख और दुख साथ-साथ चलते हैं। “फ़लक” यानी किस्मत—वह आनंद देती है तो पीड़ा भी देती है। “नक़्क़ारे” (जश्न के बाजे) और “मातम” (शोक) का विरोध दिखाकर कहा गया है कि उत्सव के बीच भी दुख मौजूद रहता है। भाव यह है कि खुशियों में विनम्र रहो और दुख में धैर्य रखो।

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