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अल्लामा इक़बाल की टॉप 20 शायरी
माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Interpretation:
Rekhta AI
वक्ता अपनी अयोग्यता स्वीकार करके विनम्रता दिखाता है, पर अपनी सच्ची चाह और लगातार प्रतीक्षा को अपने पक्ष में रखता है। वह कहता है कि मिलने की पात्रता न सही, मेरी लगन तो देखी जाए। यहाँ “दीद” केवल देखना नहीं, बल्कि निकटता और कृपा का संकेत है। भाव का केंद्र तड़प, भक्ति-सा समर्पण और आशा है।
Interpretation:
Rekhta AI
वक्ता अपनी अयोग्यता स्वीकार करके विनम्रता दिखाता है, पर अपनी सच्ची चाह और लगातार प्रतीक्षा को अपने पक्ष में रखता है। वह कहता है कि मिलने की पात्रता न सही, मेरी लगन तो देखी जाए। यहाँ “दीद” केवल देखना नहीं, बल्कि निकटता और कृपा का संकेत है। भाव का केंद्र तड़प, भक्ति-सा समर्पण और आशा है।
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर आत्म-शक्ति और आत्म-निर्माण का संदेश देता है। “स्वत्व/ख़ुदी” यहाँ जागरूक, अनुशासित और साहसी व्यक्तित्व का रूपक है जो हालात के आगे हार नहीं मानता। ईश्वर का बंदे से पूछना यह दिखाता है कि सही दिशा में बढ़ा हुआ इंसान केवल भाग्य पर नहीं टिकता, वह चुनता और गढ़ता है। भावनात्मक रूप से यह विश्वास, प्रयास और जिम्मेदारी की पुकार है।
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर आत्म-शक्ति और आत्म-निर्माण का संदेश देता है। “स्वत्व/ख़ुदी” यहाँ जागरूक, अनुशासित और साहसी व्यक्तित्व का रूपक है जो हालात के आगे हार नहीं मानता। ईश्वर का बंदे से पूछना यह दिखाता है कि सही दिशा में बढ़ा हुआ इंसान केवल भाग्य पर नहीं टिकता, वह चुनता और गढ़ता है। भावनात्मक रूप से यह विश्वास, प्रयास और जिम्मेदारी की पुकार है।
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Interpretation:
Rekhta AI
यहाँ नरगिस को आँख का रूपक माना गया है और “बे-नूरी” से आशय भीतर की रोशनी/समझ की कमी है। “चमन” समाज या दुनिया है, जहाँ सही दृष्टि रखने वाला व्यक्ति बहुत कम मिलता है। भाव यह है कि अज्ञान और अंधापन लंबे समय तक रहता है, और सच्ची दूरदृष्टि का जन्म दुर्लभ होता है।
Interpretation:
Rekhta AI
यहाँ नरगिस को आँख का रूपक माना गया है और “बे-नूरी” से आशय भीतर की रोशनी/समझ की कमी है। “चमन” समाज या दुनिया है, जहाँ सही दृष्टि रखने वाला व्यक्ति बहुत कम मिलता है। भाव यह है कि अज्ञान और अंधापन लंबे समय तक रहता है, और सच्ची दूरदृष्टि का जन्म दुर्लभ होता है।
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तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा
तिरे सामने आसमाँ और भी हैं
Interpretation:
Rekhta AI
बाज़ यहाँ ऊँचे हौसले और स्वतंत्र स्वभाव का प्रतीक है, जो रुककर नहीं जीता बल्कि ऊपर उठता रहता है। कवि कहता है कि संतोष करके ठहरना नहीं, आगे बढ़ते रहना चाहिए। “और भी आकाश” नए अवसरों और बड़ी मंज़िलों का रूपक है। भाव-केन्द्र में उम्मीद और निरंतर प्रयास की पुकार है।
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Rekhta AI
बाज़ यहाँ ऊँचे हौसले और स्वतंत्र स्वभाव का प्रतीक है, जो रुककर नहीं जीता बल्कि ऊपर उठता रहता है। कवि कहता है कि संतोष करके ठहरना नहीं, आगे बढ़ते रहना चाहिए। “और भी आकाश” नए अवसरों और बड़ी मंज़िलों का रूपक है। भाव-केन्द्र में उम्मीद और निरंतर प्रयास की पुकार है।
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सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं
Interpretation:
Rekhta AI
यह शे’र बताता है कि जो सीमा हमें आख़िरी लगती है, उसके आगे भी नई मंज़िलें होती हैं। “सितारे” यहाँ ऊँचाई और पहुँच की सीमा का संकेत हैं, और उनसे आगे बढ़ने की प्रेरणा है। दूसरी पंक्ति में प्रेम को निरंतर परीक्षा माना गया है, जिसमें हर कदम पर नया साहस और धैर्य चाहिए। भाव है—आशा के साथ आगे बढ़ते रहो, मंज़िल अभी बाकी है।
Interpretation:
Rekhta AI
यह शे’र बताता है कि जो सीमा हमें आख़िरी लगती है, उसके आगे भी नई मंज़िलें होती हैं। “सितारे” यहाँ ऊँचाई और पहुँच की सीमा का संकेत हैं, और उनसे आगे बढ़ने की प्रेरणा है। दूसरी पंक्ति में प्रेम को निरंतर परीक्षा माना गया है, जिसमें हर कदम पर नया साहस और धैर्य चाहिए। भाव है—आशा के साथ आगे बढ़ते रहो, मंज़िल अभी बाकी है।
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अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी
तू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर कहता है कि जीवन का अर्थ बाहर नहीं, अपने भीतर झाँकने से मिलता है। “डूबना” अपने मन की गहराई में उतरने का रूपक है, जहाँ असली पहचान और दिशा मिलती है। दूसरे मिसरे में संदेश है कि किसी के पीछे चलने से बेहतर है खुद का होना—स्वतंत्र और जागरूक। भाव आत्मजागरण और स्वत्व का है।
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर कहता है कि जीवन का अर्थ बाहर नहीं, अपने भीतर झाँकने से मिलता है। “डूबना” अपने मन की गहराई में उतरने का रूपक है, जहाँ असली पहचान और दिशा मिलती है। दूसरे मिसरे में संदेश है कि किसी के पीछे चलने से बेहतर है खुद का होना—स्वतंत्र और जागरूक। भाव आत्मजागरण और स्वत्व का है।
तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ
मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
Interpretation:
Rekhta AI
यहाँ बोलने वाला प्रेम का थोड़ा-सा नहीं, उसका चरम चाहता है। दूसरी पंक्ति में वह अपनी ही चाह की बड़ी माँग को ‘भोलेपन’ कहकर मान लेता है। “अंत” या “सीमा” पूर्णता और पूरी तरह समर्पित होने का संकेत है, और “भोलेपन” में हल्की-सी आत्म-विडंबना भी है। भाव-केन्द्र ललक, भक्ति और विनम्रता है।
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Rekhta AI
यहाँ बोलने वाला प्रेम का थोड़ा-सा नहीं, उसका चरम चाहता है। दूसरी पंक्ति में वह अपनी ही चाह की बड़ी माँग को ‘भोलेपन’ कहकर मान लेता है। “अंत” या “सीमा” पूर्णता और पूरी तरह समर्पित होने का संकेत है, और “भोलेपन” में हल्की-सी आत्म-विडंबना भी है। भाव-केन्द्र ललक, भक्ति और विनम्रता है।
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दिल से जो बात निकलती है असर रखती है
पर नहीं ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है
Interpretation:
Rekhta AI
अल्लामा इक़बाल बताते हैं कि सच्चे मन से कही गई बात अपने आप प्रभाव पैदा करती है। “बिना पंख की उड़ान” एक रूपक है: बाहरी साधन, पद या दिखावा न भी हो, तब भी सच्चाई ऊँचाई तक पहुँच जाती है। भाव यह है कि अंदर की सच्ची शक्ति शब्दों को दूर तक ले जाती है।
Interpretation:
Rekhta AI
अल्लामा इक़बाल बताते हैं कि सच्चे मन से कही गई बात अपने आप प्रभाव पैदा करती है। “बिना पंख की उड़ान” एक रूपक है: बाहरी साधन, पद या दिखावा न भी हो, तब भी सच्चाई ऊँचाई तक पहुँच जाती है। भाव यह है कि अंदर की सच्ची शक्ति शब्दों को दूर तक ले जाती है।
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नशा पिला के गिराना तो सब को आता है
मज़ा तो जब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर आसान नुकसान पहुँचाने और मुश्किल मदद करने का फर्क दिखाता है। ‘नशा’ यहाँ किसी भी ऐसे लालच या असर का रूपक है जो इंसान को कमज़ोर कर दे, और ‘साक़ी’ उस व्यक्ति का प्रतीक है जिसके हाथ में देना या रोकना है। कवि कहता है गिराना तो आम है, असली महानता गिरते को सहारा देकर बचाने में है।
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Rekhta AI
यह शेर आसान नुकसान पहुँचाने और मुश्किल मदद करने का फर्क दिखाता है। ‘नशा’ यहाँ किसी भी ऐसे लालच या असर का रूपक है जो इंसान को कमज़ोर कर दे, और ‘साक़ी’ उस व्यक्ति का प्रतीक है जिसके हाथ में देना या रोकना है। कवि कहता है गिराना तो आम है, असली महानता गिरते को सहारा देकर बचाने में है।
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टैग : संसद
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अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे
Interpretation:
Rekhta AI
यह शे’र मन और भावना के बीच संतुलन की बात करता है। बुद्धि को पहरेदार मानकर कहा गया है कि वह हृदय को गलतियों से बचा सकती है, लेकिन हर समय का ज्यादा सोच-विचार भावनाओं और हिम्मत को दबा देता है। इसलिए कभी-कभी अपने भीतर की सच्ची अनुभूति पर भरोसा करके हृदय को स्वतंत्र छोड़ना भी जरूरी है।
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Rekhta AI
यह शे’र मन और भावना के बीच संतुलन की बात करता है। बुद्धि को पहरेदार मानकर कहा गया है कि वह हृदय को गलतियों से बचा सकती है, लेकिन हर समय का ज्यादा सोच-विचार भावनाओं और हिम्मत को दबा देता है। इसलिए कभी-कभी अपने भीतर की सच्ची अनुभूति पर भरोसा करके हृदय को स्वतंत्र छोड़ना भी जरूरी है।
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जिस खेत से दहक़ाँ को मयस्सर नहीं रोज़ी
उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो
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यह दोहा/शेर उस व्यवस्था के खिलाफ है जिसमें मेहनत किसान करता है, पर रोटी उसे नहीं मिलती। “खेत” यहाँ एक ऐसे ढाँचे का संकेत है जो लाभ तो देता है, पर न्याय नहीं। “गेहूँ की बाल जलाना” प्रतीक है कि अन्यायपूर्ण लाभ को ठुकराकर ऐसी व्यवस्था को तोड़ देना चाहिए। भाव में तीखा विरोध और इंसानी गरिमा की माँग है।
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Rekhta AI
यह दोहा/शेर उस व्यवस्था के खिलाफ है जिसमें मेहनत किसान करता है, पर रोटी उसे नहीं मिलती। “खेत” यहाँ एक ऐसे ढाँचे का संकेत है जो लाभ तो देता है, पर न्याय नहीं। “गेहूँ की बाल जलाना” प्रतीक है कि अन्यायपूर्ण लाभ को ठुकराकर ऐसी व्यवस्था को तोड़ देना चाहिए। भाव में तीखा विरोध और इंसानी गरिमा की माँग है।
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यक़ीं मोहकम अमल पैहम मोहब्बत फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी में हैं ये मर्दों की शमशीरें
Interpretation:
Rekhta AI
अल्लामा इक़बाल कहते हैं कि जीत बाहरी हथियारों से नहीं, भीतर की शक्तियों से मिलती है—मजबूत भरोसा, निरंतर काम और व्यापक प्रेम। “जीवन का जिहाद” यहाँ रोज़ का संघर्ष है, जिसमें इंसान अपने लक्ष्य और नैतिकता के लिए लड़ता है। इन गुणों को “तलवारें” कहकर कवि बताता है कि असली वीरता चरित्र में होती है। यह शेर हिम्मत और लगातार प्रयास की प्रेरणा देता है।
Interpretation:
Rekhta AI
अल्लामा इक़बाल कहते हैं कि जीत बाहरी हथियारों से नहीं, भीतर की शक्तियों से मिलती है—मजबूत भरोसा, निरंतर काम और व्यापक प्रेम। “जीवन का जिहाद” यहाँ रोज़ का संघर्ष है, जिसमें इंसान अपने लक्ष्य और नैतिकता के लिए लड़ता है। इन गुणों को “तलवारें” कहकर कवि बताता है कि असली वीरता चरित्र में होती है। यह शेर हिम्मत और लगातार प्रयास की प्रेरणा देता है।
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टैग : प्रेरणादायक
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बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यूँ
कार-ए-जहाँ दराज़ है अब मिरा इंतिज़ार कर
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कवि जन्नत जैसी सुख-शांति से दूर भेजे जाने का कारण पूछता है और इसे जीवन-यात्रा का रूपक बनाता है। यहाँ सफ़र का अर्थ है धरती पर मनुष्य की जिम्मेदारी और संघर्ष। दूसरे चरण में वह अपने प्रिय/अपने असली ठिकाने से कहता है कि काम लंबा है, इसलिए धैर्य रखो। भाव में बिछोह की कसक के साथ अपना कर्तव्य पूरा करने का संकल्प है।
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कवि जन्नत जैसी सुख-शांति से दूर भेजे जाने का कारण पूछता है और इसे जीवन-यात्रा का रूपक बनाता है। यहाँ सफ़र का अर्थ है धरती पर मनुष्य की जिम्मेदारी और संघर्ष। दूसरे चरण में वह अपने प्रिय/अपने असली ठिकाने से कहता है कि काम लंबा है, इसलिए धैर्य रखो। भाव में बिछोह की कसक के साथ अपना कर्तव्य पूरा करने का संकल्प है।
उरूज-ए-आदम-ए-ख़ाकी से अंजुम सहमे जाते हैं
कि ये टूटा हुआ तारा मह-ए-कामिल न बन जाए
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इस शेर में इंसान को “टूटा तारा” कहा गया है, यानी ऐसा जो गिरा हुआ या छोटा समझा जाता है, मगर उसके उत्थान से आकाश के तारे भी घबराते हैं। “पूरा चाँद” पूर्णता, चमक और मुकम्मल बन जाने का प्रतीक है। भाव यह है कि इंसान की क्षमता इतनी बड़ी है कि वह अपनी कोशिश से ऊँचाइयों तक पहुँचकर पुरानी सीमाओं और ऊँच-नीच को बदल सकता है।
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इस शेर में इंसान को “टूटा तारा” कहा गया है, यानी ऐसा जो गिरा हुआ या छोटा समझा जाता है, मगर उसके उत्थान से आकाश के तारे भी घबराते हैं। “पूरा चाँद” पूर्णता, चमक और मुकम्मल बन जाने का प्रतीक है। भाव यह है कि इंसान की क्षमता इतनी बड़ी है कि वह अपनी कोशिश से ऊँचाइयों तक पहुँचकर पुरानी सीमाओं और ऊँच-नीच को बदल सकता है।
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तू ने ये क्या ग़ज़ब किया मुझ को भी फ़ाश कर दिया
मैं ही तो एक राज़ था सीना-ए-काएनात में
Interpretation:
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कवि “तुम” से शिकायत करता है कि उसने उसे उजागर कर दिया, जबकि उसका मूल्य छिपे रहने में था। “ब्रह्मांड के सीने में रहस्य” कहकर वह अपने भीतर की गहरी पहचान, आत्म-सच या निजी अनुभूति की ओर इशारा करता है। अब उसके खुल जाने से उसकी गरिमा और अलगपन को चोट लगी है। इसलिए यह प्रकटीकरण उसे अत्याचार-सा लगता है।
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कवि “तुम” से शिकायत करता है कि उसने उसे उजागर कर दिया, जबकि उसका मूल्य छिपे रहने में था। “ब्रह्मांड के सीने में रहस्य” कहकर वह अपने भीतर की गहरी पहचान, आत्म-सच या निजी अनुभूति की ओर इशारा करता है। अब उसके खुल जाने से उसकी गरिमा और अलगपन को चोट लगी है। इसलिए यह प्रकटीकरण उसे अत्याचार-सा लगता है।
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न पूछो मुझ से लज़्ज़त ख़ानमाँ-बर्बाद रहने की
नशेमन सैकड़ों मैं ने बना कर फूँक डाले हैं
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इस शेर में मन की बेचैनी और ठहराव से बगावत दिखाई देती है। “घोंसला/बसेरा” घर, सुरक्षा और लगाव का रूपक है, जिसे जलाना अपने ही बनाए बंधनों को तोड़ना है। भाव यह है कि वक्ता आराम की जगह स्वतंत्रता और आगे बढ़ते रहने को चुनता है, चाहे उसके लिए उजड़ना ही क्यों न हो।
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इस शेर में मन की बेचैनी और ठहराव से बगावत दिखाई देती है। “घोंसला/बसेरा” घर, सुरक्षा और लगाव का रूपक है, जिसे जलाना अपने ही बनाए बंधनों को तोड़ना है। भाव यह है कि वक्ता आराम की जगह स्वतंत्रता और आगे बढ़ते रहने को चुनता है, चाहे उसके लिए उजड़ना ही क्यों न हो।
अनोखी वज़्अ' है सारे ज़माने से निराले हैं
ये आशिक़ कौन सी बस्ती के या-रब रहने वाले हैं
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर प्रेमियों की अलग पहचान पर हैरानी और सम्मान जताता है। उनका “अनोखा ढंग” बताता है कि सच्चा प्रेम आम चलन और समझौते से ऊपर होता है। कवि का ईश्वर से सवाल इस अलगपन को रूपक बना देता है, जैसे इन प्रेमियों का असली ठिकाना कोई ऊँची, आध्यात्मिक दुनिया हो। भाव-सार: प्रेम की विलक्षणता पर विस्मय।
Interpretation:
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यह शेर प्रेमियों की अलग पहचान पर हैरानी और सम्मान जताता है। उनका “अनोखा ढंग” बताता है कि सच्चा प्रेम आम चलन और समझौते से ऊपर होता है। कवि का ईश्वर से सवाल इस अलगपन को रूपक बना देता है, जैसे इन प्रेमियों का असली ठिकाना कोई ऊँची, आध्यात्मिक दुनिया हो। भाव-सार: प्रेम की विलक्षणता पर विस्मय।