विसाल पर 20 बेहतरीन शेर
महबूब से विसाल की आरज़ू
तो आप सबने पाल रक्खी होगी लेकिन वो आरज़ू ही क्या जो पूरी हो जाए। शायरी में भी आप देखेंगे कि बेचारा आशिक़ उम्र-भर विसाल की एक नाकाम ख़्वाहिश में ही जीता रहता है। यहाँ हमने कुछ ऐसे अशआर जमा किए हैं जो हिज्र-ओ-विसाल की इस दिल-चस्प कहानी को सिलसिला-वार बयान करते हैं। इस कहानी में कुछ ऐसे मोड़ भी हैं जो आपको हैरान कर देंगे।
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ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
हमारे नसीब में यह नहीं लिखा था कि हमें अपने प्रियतम से मिलन प्राप्त होता।
अगर हम और ज़्यादा दिन ज़िंदा रहते, तो भी बस उनका इंतज़ार ही करते रहते।
हमारे नसीब में यह नहीं लिखा था कि हमें अपने प्रियतम से मिलन प्राप्त होता।
अगर हम और ज़्यादा दिन ज़िंदा रहते, तो भी बस उनका इंतज़ार ही करते रहते।
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शब-ए-विसाल है गुल कर दो इन चराग़ों को
ख़ुशी की बज़्म में क्या काम जलने वालों का
यह मिलन की रात है, इन दीयों को बुझा दो।
ख़ुशी की महफ़िल में तड़पते-जलते लोगों का क्या काम है?
यह मिलन की रात है, इन दीयों को बुझा दो।
ख़ुशी की महफ़िल में तड़पते-जलते लोगों का क्या काम है?
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बदन के दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं
कि छू रहा हूँ तुझे और पिघल रहा हूँ मैं
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टैग: बदन
थी वस्ल में भी फ़िक्र-ए-जुदाई तमाम शब
वो आए तो भी नींद न आई तमाम शब
मिलन में भी सारी रात बिछड़ने की चिंता लगी रही।
वह आ भी गए, फिर भी सारी रात नींद नहीं आई।
मिलन में भी सारी रात बिछड़ने की चिंता लगी रही।
वह आ भी गए, फिर भी सारी रात नींद नहीं आई।
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टैग्ज़: जुदाईऔर 1 अन्य
ज़रा विसाल के बाद आइना तो देख ऐ दोस्त
तिरे जमाल की दोशीज़गी निखर आई
मिलन के बाद ज़रा आईने में अपना चेहरा तो देखो, दोस्त।
तुम्हारे सौंदर्य का कुमारपन और भी ज़्यादा निखर आया है।
मिलन के बाद ज़रा आईने में अपना चेहरा तो देखो, दोस्त।
तुम्हारे सौंदर्य का कुमारपन और भी ज़्यादा निखर आया है।
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वस्ल में रंग उड़ गया मेरा
क्या जुदाई को मुँह दिखाऊँगा
मिलन में भी मेरी चमक और ताकत फीकी पड़ गई।
तो फिर बिछड़ने के दर्द के सामने मैं कैसे खड़ा हो पाऊँगा?
मिलन में भी मेरी चमक और ताकत फीकी पड़ गई।
तो फिर बिछड़ने के दर्द के सामने मैं कैसे खड़ा हो पाऊँगा?
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वो मिरी रूह की उलझन का सबब जानता है
जिस्म की प्यास बुझाने पे भी राज़ी निकला
Rekhta
AI Explanation
इस शे’र का विषय “रूह की उलझन” पर स्थित है। आत्मा की शरीर से अनुरूपता ख़ूब है। शायर का यह कहना है कि वो अर्थात उसका प्रिय उसकी आत्मा की उलझन का कारण जानता है। यानी मेरी आत्मा किस उलझन में है उसे अच्छी तरह मालूम है। मैं ये सोचता था कि वो सिर्फ़ मेरी आत्मा की उलझन को दूर करेगा मगर वो तो मेरे शरीर की प्यास बुझाने के लिए भी राज़ी होगया। दूसरे मिसरे में शब्द “भी” बहुत अर्थपूर्ण है। इससे स्पष्ट होता है कि शायर का प्रिय हालांकि यह जानता है कि वो आत्मा की उलझन में ग्रस्त है और आत्मा और शरीर के बीच एक तरह का अंतर्विरोध है। जिसका यह अर्थ है कि मेरे प्रिय को मालूम था कि मेरी आत्मा के भ्रम की वजह वास्तव में शरीर की प्यास ही है मगर प्रिय आत्मा की जगह उसके शरीर की प्यास बुझाने के लिए तैयार हो गया।
शफ़क़ सुपुरी
Rekhta
AI Explanation
इस शे’र का विषय “रूह की उलझन” पर स्थित है। आत्मा की शरीर से अनुरूपता ख़ूब है। शायर का यह कहना है कि वो अर्थात उसका प्रिय उसकी आत्मा की उलझन का कारण जानता है। यानी मेरी आत्मा किस उलझन में है उसे अच्छी तरह मालूम है। मैं ये सोचता था कि वो सिर्फ़ मेरी आत्मा की उलझन को दूर करेगा मगर वो तो मेरे शरीर की प्यास बुझाने के लिए भी राज़ी होगया। दूसरे मिसरे में शब्द “भी” बहुत अर्थपूर्ण है। इससे स्पष्ट होता है कि शायर का प्रिय हालांकि यह जानता है कि वो आत्मा की उलझन में ग्रस्त है और आत्मा और शरीर के बीच एक तरह का अंतर्विरोध है। जिसका यह अर्थ है कि मेरे प्रिय को मालूम था कि मेरी आत्मा के भ्रम की वजह वास्तव में शरीर की प्यास ही है मगर प्रिय आत्मा की जगह उसके शरीर की प्यास बुझाने के लिए तैयार हो गया।
शफ़क़ सुपुरी