Jigar Moradabadi's Photo'

जिगर मुरादाबादी

1890 - 1960 | मुरादाबाद, भारत

सबसे प्रमुख पूर्वाधुनिक शायरों में शामिल अत्याधिक लोकप्रियता के लिए विख्यात

सबसे प्रमुख पूर्वाधुनिक शायरों में शामिल अत्याधिक लोकप्रियता के लिए विख्यात

70.1K
Favorite

श्रेणीबद्ध करें

हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं

हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं

दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं

कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

हम ने सीने से लगाया दिल अपना बन सका

मुस्कुरा कर तुम ने देखा दिल तुम्हारा हो गया

ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे

इक आग का दरिया है और डूब के जाना है

इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है

सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है

जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं

वही दुनिया बदलते जा रहे हैं

उन का जो फ़र्ज़ है वो अहल-ए-सियासत जानें

मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे

अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल

हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया

तेरी आँखों का कुछ क़ुसूर नहीं

हाँ मुझी को ख़राब होना था

इतने हिजाबों पर तो ये आलम है हुस्न का

क्या हाल हो जो देख लें पर्दा उठा के हम

तिरे जमाल की तस्वीर खींच दूँ लेकिन

ज़बाँ में आँख नहीं आँख में ज़बान नहीं

इश्क़ जब तक कर चुके रुस्वा

आदमी काम का नहीं होता

till love does not cause him disgrace

in this world man has no place

क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है

हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है

कि तुझ बिन इस तरह दोस्त घबराता हूँ मैं

जैसे हर शय में किसी शय की कमी पाता हूँ मैं

आग़ाज़-ए-मोहब्बत का अंजाम बस इतना है

जब दिल में तमन्ना थी अब दिल ही तमन्ना है

मिरी ज़िंदगी तो गुज़री तिरे हिज्र के सहारे

मिरी मौत को भी प्यारे कोई चाहिए बहाना

यूँ ज़िंदगी गुज़ार रहा हूँ तिरे बग़ैर

जैसे कोई गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

आदमी आदमी से मिलता है

दिल मगर कम किसी से मिलता है

पहले शराब ज़ीस्त थी अब ज़ीस्त है शराब

कोई पिला रहा है पिए जा रहा हूँ मैं

आतिश-ए-इश्क़ वो जहन्नम है

जिस में फ़िरदौस के नज़ारे हैं

आदत के ब'अद दर्द भी देने लगा मज़ा

हँस हँस के आह आह किए जा रहा हूँ मैं

दोनों हाथों से लूटती है हमें

कितनी ज़ालिम है तेरी अंगड़ाई

इब्तिदा वो थी कि जीना था मोहब्बत में मुहाल

इंतिहा ये है कि अब मरना भी मुश्किल हो गया

आबाद अगर दिल हो तो बरबाद कीजिए

गुलशन बन सके तो बयाबाँ बनाइए

हसीं तेरी आँखें हसीं तेरे आँसू

यहीं डूब जाने को जी चाहता है

या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से

कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है

दुनिया के सितम याद अपनी ही वफ़ा याद

अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद

एक ऐसा भी वक़्त होता है

मुस्कुराहट भी आह होती है

अल्लाह अगर तौफ़ीक़ दे इंसान के बस का काम नहीं

फ़ैज़ान-ए-मोहब्बत आम सही इरफ़ान-ए-मोहब्बत आम नहीं

बहुत हसीन सही सोहबतें गुलों की मगर

वो ज़िंदगी है जो काँटों के दरमियाँ गुज़रे

मेरी निगाह-ए-शौक़ भी कुछ कम नहीं मगर

फिर भी तिरा शबाब तिरा ही शबाब है

किधर से बर्क़ चमकती है देखें वाइज़

मैं अपना जाम उठाता हूँ तू किताब उठा

where does lightening strike, priest, let us look

I will raise my glass you raise your holy book

दिल है क़दमों पर किसी के सर झुका हो या हो

बंदगी तो अपनी फ़ितरत है ख़ुदा हो या हो

ज़िंदगी इक हादसा है और कैसा हादसा

मौत से भी ख़त्म जिस का सिलसिला होता नहीं

कभी उन मद-भरी आँखों से पिया था इक जाम

आज तक होश नहीं होश नहीं होश नहीं

सुना है हश्र में हर आँख उसे बे-पर्दा देखेगी

मुझे डर है तौहीन-ए-जमाल-ए-यार हो जाए

अब तो ये भी नहीं रहा एहसास

दर्द होता है या नहीं होता

ग़रज़ किसी से वास्ता मुझे काम अपने ही काम से

तिरे ज़िक्र से तिरी फ़िक्र से तिरी याद से तिरे नाम से

उसी को कहते हैं जन्नत उसी को दोज़ख़ भी

वो ज़िंदगी जो हसीनों के दरमियाँ गुज़रे

हमीं जब होंगे तो क्या रंग-ए-महफ़िल

किसे देख कर आप शरमाइएगा

दर्द ग़म दिल की तबीअत बन गए

अब यहाँ आराम ही आराम है

the heart is accustomed to sorrow and pain

in lasting comfort now I can remain

आदमी के पास सब कुछ है मगर

एक तन्हा आदमिय्यत ही नहीं

हम इश्क़ के मारों का इतना ही फ़साना है

रोने को नहीं कोई हँसने को ज़माना है

इधर से भी है सिवा कुछ उधर की मजबूरी

कि हम ने आह तो की उन से आह भी हुई

मौत क्या एक लफ़्ज़-ए-बे-मअ'नी

जिस को मारा हयात ने मारा

हाए रे मजबूरियाँ महरूमियाँ नाकामियाँ

इश्क़ आख़िर इश्क़ है तुम क्या करो हम क्या करें

कुछ खटकता तो है पहलू में मिरे रह रह कर

अब ख़ुदा जाने तिरी याद है या दिल मेरा

सब को मारा 'जिगर' के शेरों ने

और 'जिगर' को शराब ने मारा

हुस्न को भी कहाँ नसीब 'जिगर'

वो जो इक शय मिरी निगाह में है

गुनाहगार के दिल से बच के चल ज़ाहिद

यहीं कहीं तिरी जन्नत भी पाई जाती है