नदीम भाभा के शेर
मोहब्बत, हिज्र, नफ़रत मिल चुकी है
मैं तक़रीबन मुकम्मल हो चुका हूँ
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हम ग़ुलामी को मुक़द्दर की तरह जानते हैं
हम तिरी जीत तिरी मात से निकले हुए हैं
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कुछ इस लिए भी अकेला सा हो गया हूँ 'नदीम'
सभी को दोस्त बनाया है दुश्मनी नहीं की
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और कोई पहचान मिरी बनती ही नहीं
जानते हैं सब लोग कि बस तेरा हूँ मैं
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मोहब्बत ने अकेला कर दिया है
मैं अपनी ज़ात में इक क़ाफ़िला था
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सारे सवाल आसान हैं मुश्किल एक जवाब
हम भी एक जवाब हैं कोई सवाल करे
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बद-नसीबी कि इश्क़ कर के भी
कोई धोका नहीं हुआ मिरे साथ
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दिल मुब्तला-ए-हिज्र रिफ़ाक़त में रह गया
लगता है कोई फ़र्क़ मोहब्बत में रह गया
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दिल से इक याद भुला दी गई है
किसी ग़फ़लत की सज़ा दी गई है
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मैं लौ में लौ हूँ, अलाव में हूँ अलाव 'नदीम'
सो हर चराग़ मिरा ए'तिराफ़ करता रहा
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मैं ने मंज़िल की दुआ माँगी थी
मेरी रफ़्तार बढ़ा दी गई है
और अब खुला कि वो काबा नहीं तिरा घर था
तमाम उम्र मैं जिस का तवाफ़ करता रहा
ज़रूर उस का कोई प्यास से मरा होगा
वो कितने प्यार से पानी पिला रहा था हमें
पर्दा-दारों ने ख़ुद-कुशी कर ली
सहन झाँका गया किसी छत से
ग़लत न जान कि आँखें नहीं रहीं मेरी
सो छू रहा हूँ कि चेहरा समझ में आ जाए
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कुछ फूलों की ख़ातिर भी कुछ फूलों का
सब से अच्छा रंग चुराना पड़ता है
हम किसी ज़ोम में नाराज़ हुए हैं तुझ से
हम किसी बात पे औक़ात से निकले हुए हैं
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टैग : ख़फ़ा
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इस दुनिया को छोड़ के जिस में तुम भी हो
जाता कौन है लेकिन जाना पड़ता है
अब मोहब्बत का सबब है वहशत
वर्ना हसरत तो मिटा दी गई है
अब तू ही मेरी ख़ाली हथेली की लाज रख
मुझ से तो कोई फ़र्क़ इबादत में रह गया
हमारी रूह परिंदों को सौंप दी जाए
कि ये बदन तो गुनहगार हो गए साहिब
बात पेड़ों की नहीं, ग़म है परिंदों का 'नदीम'
घोंसले जिन के कोई तोड़ दिया करता था
मैं ऐसे मोड़ पर अपनी कहानी छोड़ आया हूँ
किसी की आँख में पानी ही पानी छोड़ आया हूँ
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टैग : जुदाई
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उँगलियाँ फेर मेरे बालों में
ये मिरा दर्द-ए-सर नहीं जाता
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टैग : रोमांटिक
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हमारे पाँव में कीलें और आँखों से लहू टपके
हमारी जो भी हालत हो तुम्हारे साथ रहना है
फिर मुझे ख़ुद भी ख़बर हो न सकी मैं हूँ कहाँ
आख़िरी बार तिरे गाँव में देखा गया हूँ
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टैग : गाँव
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जाने किस को राज़ी करना है मुझ को
जाने किस की ख़ातिर नाच रहा हूँ मैं
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ख़ुदा की तरह कोई आदमी भी है शायद
नज़र जो आता नहीं आस-पास हो कर भी
इश्क़ इतना भी क्या ज़रूरी है
कोई बे-इश्क़ मर नहीं जाता
तुम इन्हें बारिशें समझते हो
हम ने रोने का तज्रबा किया है
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मुझ को मिट्टी के पियाले में पिला ताज़ा शराब
जिस्म होने लगा बे-कार कोई मस्ती हो
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टैग : मय-कशी
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ख़ुदा करे तुझे तहज़ीब-ए-मय-कशी हो नसीब
ख़ुदा करे तुझे नश्शा समझ में आ जाए
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टैग : मय-कशी
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याद अभी नहीं हमें ज़ेहन पे ज़ोर दे चुके
तुम ही से मिलने आए थे तुम से ही काम था ज़रूर
एक रूमाल आँसुओं से भरा
और इक ख़त जला हुआ मिरे पास
मुझे दरिया, कभी सहरा के हवाले कर के
वो कहानी को नया मोड़ दिया करता था
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टैग : सहरा
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अपनी गर्दन झुका के बात करो
तुम निकाले गए हो जन्नत से
तुम ने जब उस की बात की तुम पे भी प्यार आ गया
चूमा नहीं तुम्हें मियाँ गरचे मक़ाम था ज़रूर
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टैग : किस
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लोग किरदार बनना चाहते हैं
जैसे मुमकिन है सब रियाज़त से
चराग़ दफ़्न किए थे 'नदीम' क़ब्रों में
ज़मीं से चाँद नुमूदार हो गए साहिब
ये तिरी गुफ़्तुगू का लम्हा है
इस घड़ी है मिरा ख़ुदा मिरे पास
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टैग : ख़ुदा
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ऐ मुझे ख़्वाब दिखाते हुए लोगो सुन लो
मेरा दुख ये है कोई ख़्वाब नहीं भूलता मैं
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टैग : ख़्वाब
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तुझे कुछ वक़्त चाहिए मिरी जान
वक़्त ही तो नहीं बचा मिरे पास
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गले लगा के उसे ख़्वाब में बहुत रोए
और इतना रोए कि बेदार हो गए साहिब
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टैग : ख़्वाब
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हम से खेला गया है सच-मुच में
या खिलौने का तज्रबा किया है
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