टूटे हुए दिलों के लिए 20 बेहतरीन शेर

टूटे हुए दिलों की शायरी

टॉप 20 सीरीज़

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए

फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए

अहमद फ़राज़

ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता

एक ही शख़्स था जहान में क्या

जौन एलिया

आँख से दूर हो दिल से उतर जाएगा

वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा

अहमद फ़राज़

हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद

जो नहीं जानते वफ़ा क्या है

मिर्ज़ा ग़ालिब

दोस्त हम ने तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद

महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी कभी

नासिर काज़मी

वो टूटते हुए रिश्तों का हुस्न-ए-आख़िर था

कि चुप सी लग गई दोनों को बात करते हुए

राजेन्द्र मनचंदा बानी

मुद्दत हुई इक शख़्स ने दिल तोड़ दिया था

इस वास्ते अपनों से मोहब्बत नहीं करते

साक़ी फ़ारुक़ी

बद-क़िस्मती को ये भी गवारा हो सका

हम जिस पे मर मिटे वो हमारा हो सका

शकेब जलाली

इलाज-ए-दर्द-ए-दिल तुम से मसीहा हो नहीं सकता

तुम अच्छा कर नहीं सकते मैं अच्छा हो नहीं सकता

मुज़्तर ख़ैराबादी

दिल सरापा दर्द था वो इब्तिदा-ए-इश्क़ थी

इंतिहा ये है कि 'फ़ानी' दर्द अब दिल हो गया

फ़ानी बदायुनी

ज़माने भर के ग़म या इक तिरा ग़म

ये ग़म होगा तो कितने ग़म होंगे

हफ़ीज़ होशियारपुरी

हो दूर इस तरह कि तिरा ग़म जुदा हो

पास तो यूँ कि जैसे कभी तू मिला हो

अहमद फ़राज़

ये हमीं हैं कि तिरा दर्द छुपा कर दिल में

काम दुनिया के ब-दस्तूर किए जाते हैं

अज्ञात

कुछ दिन के बा'द उस से जुदा हो गए 'मुनीर'

उस बेवफ़ा से अपनी तबीअत नहीं मिली

मुनीर नियाज़ी

ये बात तर्क-ए-तअल्लुक़ के बाद हम समझे

किसी से तर्क-ए-तअल्लुक़ भी इक तअल्लुक़ है

अज्ञात

शौक़ चढ़ती धूप जाता वक़्त घटती छाँव है

बा-वफ़ा जो आज हैं कल बे-वफ़ा हो जाएँगे

आरज़ू लखनवी

कहते थे हम 'दर्द' मियाँ छोड़ो ये बातें

पाई सज़ा और वफ़ा कीजिए उस से

ख़्वाजा मीर दर्द

तेरे ही ग़म में मर गए सद-शुक्र

आख़िर इक दिन तो हम को मरना था

निज़ाम रामपुरी

तिरे सुलूक का ग़म सुब्ह-ओ-शाम क्या करते

ज़रा सी बात पे जीना हराम क्या करते

रईस सिद्दीक़ी

उस ने आवारा-मिज़ाजी को नया मोड़ दिया

पा-ब-ज़ंजीर किया और मुझे छोड़ दिया

जावेद सबा

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