बेवफ़ा शायरी

इश्क़ की किताब के हर वरक़ पर वफ़ा के क़िस्से ही नहीं होते बेवफ़ाई की दास्तानें भी होती हैं। प्रेम कहानियों के कई किरदार महबूब की बेवफ़ाई ने रचे हैं। शायरी में ऐसी बेवफ़ाई का ज़िक्र जा-ब-जा मौजूद है जिसे पढ़कर कोई भी शख़्स उदास या ग़मज़दा हो सकता है। बेवफ़ाई शायरी दुख-दर्द और गिले-शिकवे की ऐसी शायरी है जिसे हारे हुए लोगों ने अपना दुख कम करने के लिए पढ़ा है। इनकी मिठास आप भी महसूस कर सकते हैं इस चयन के साथः

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी

यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता

she would have had compulsions surely

faithless without cause no one can be

she would have had compulsions surely

faithless without cause no one can be

बशीर बद्र

तुम ने किया याद कभी भूल कर हमें

हम ने तुम्हारी याद में सब कुछ भुला दिया

you did not ever think of me even by mistake

and in your thoughts everything else I did forsake

you did not ever think of me even by mistake

and in your thoughts everything else I did forsake

बहादुर शाह ज़फ़र

हम से क्या हो सका मोहब्बत में

ख़ैर तुम ने तो बेवफ़ाई की

फ़िराक़ गोरखपुरी

इक अजब हाल है कि अब उस को

याद करना भी बेवफ़ाई है

जौन एलिया

इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की

आज पहली बार उस से मैं ने बेवफ़ाई की

अहमद फ़राज़

चला था ज़िक्र ज़माने की बेवफ़ाई का

सो गया है तुम्हारा ख़याल वैसे ही

अहमद फ़राज़

आशिक़ी में बहुत ज़रूरी है

बेवफ़ाई कभी कभी करना

बशीर बद्र

हम से कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर तो है उसे

वो यार बा-वफ़ा सही बेवफ़ा तो है

जमील मलिक

बेवफ़ाई पे तेरी जी है फ़िदा

क़हर होता जो बा-वफ़ा होता

I sacrifice my heart upon your infidelity

were you faithful it would be a calamity

I sacrifice my heart upon your infidelity

were you faithful it would be a calamity

मीर तक़ी मीर

दिल भी तोड़ा तो सलीक़े से तोड़ा तुम ने

बेवफ़ाई के भी आदाब हुआ करते हैं

महताब अालम

हम उसे याद बहुत आएँगे

जब उसे भी कोई ठुकराएगा

क़तील शिफ़ाई

उड़ गई यूँ वफ़ा ज़माने से

कभी गोया किसी में थी ही नहीं

दाग़ देहलवी

मेरे ब'अद वफ़ा का धोका और किसी से मत करना

गाली देगी दुनिया तुझ को सर मेरा झुक जाएगा

क़तील शिफ़ाई

नहीं शिकवा मुझे कुछ बेवफ़ाई का तिरी हरगिज़

गिला तब हो अगर तू ने किसी से भी निभाई हो

ख़्वाजा मीर दर्द

तुम किसी के भी हो नहीं सकते

तुम को अपना बना के देख लिया

अमीर रज़ा मज़हरी

काम सकीं अपनी वफ़ाएँ तो क्या करें

उस बेवफ़ा को भूल जाएँ तो क्या करें

अख़्तर शीरानी

जाओ भी क्या करोगे मेहर-ओ-वफ़ा

बार-हा आज़मा के देख लिया

दाग़ देहलवी

ये क्या कि तुम ने जफ़ा से भी हाथ खींच लिया

मिरी वफ़ाओं का कुछ तो सिला दिया होता

अब्दुल हमीद अदम

हम ने तो ख़ुद को भी मिटा डाला

तुम ने तो सिर्फ़ बेवफ़ाई की

ख़लील-उर-रहमान आज़मी

वफ़ा की ख़ैर मनाता हूँ बेवफ़ाई में भी

मैं उस की क़ैद में हूँ क़ैद से रिहाई में भी

इफ़्तिख़ार आरिफ़

गिला लिखूँ मैं अगर तेरी बेवफ़ाई का

लहू में ग़र्क़ सफ़ीना हो आश्नाई का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जो मिला उस ने बेवफ़ाई की

कुछ अजब रंग है ज़माने का

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

उमीद उन से वफ़ा की तो ख़ैर क्या कीजे

जफ़ा भी करते नहीं वो कभी जफ़ा की तरह

आतिश बहावलपुरी

तुम जफ़ा पर भी तो नहीं क़ाएम

हम वफ़ा उम्र भर करें क्यूँ-कर

बेदिल अज़ीमाबादी

वही तो मरकज़ी किरदार है कहानी का

उसी पे ख़त्म है तासीर बेवफ़ाई की

इक़बाल अशहर

उस बेवफ़ा से कर के वफ़ा मर-मिटा 'रज़ा'

इक क़िस्सा-ए-तवील का ये इख़्तिसार है

आले रज़ा रज़ा

बे-वफ़ा तुम बा-वफ़ा मैं देखिए होता है क्या

ग़ैज़ में आने को तुम हो मुझ को प्यार आने को है

आग़ा हज्जू शरफ़

ये जफ़ाओं की सज़ा है कि तमाशाई है तू

ये वफ़ाओं की सज़ा है कि पए-दार हूँ मैं

हामिद मुख़्तार हामिद

मुदारात हमारी अदू से नफ़रत

वफ़ा ही तुम्हें आई जफ़ा ही आई

बेखुद बदायुनी

ग़लत-रवी को तिरी मैं ग़लत समझता हूँ

ये बेवफ़ाई भी शामिल मिरी वफ़ा में है

आसिम वास्ती