वैलेंटाइन डे शायरी

रूमान और इश्क़ के बग़ैर ज़िंदगी कितनी ख़ाली ख़ाली सी होती है इस का अंदाज़ा तो आप सबको होगा ही। इश्क़चाहे काइनात के हरे-भरे ख़ूबसूरत मनाज़िर का हो या इन्सानों के दर्मियान नाज़ुक ओ पेचीदा रिश्तों का इसी से ज़िंदगी की रौनक़ मरबूत है। हम सब ज़िंदगी की सफ़्फ़ाक सूरतों से बच निकलने के लिए मोहब्बत भरे लम्हों की तलाश में रहते हैं। तो आइए हमारा ये शेरी इन्तिख़ाब एक ऐसा निगार-ख़ाना है जहाँ हर तरफ़ मोहब्बत , लव, इश्क़ , बिखरा पड़ा है।

आहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम हो

साया कोई लहराए तो लगता है कि तुम हो

जाँ निसार अख़्तर

आज देखा है तुझ को देर के बअ'द

आज का दिन गुज़र जाए कहीं

नासिर काज़मी

आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब

दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होते तक

Love has a need for patience, desires are a strain

as long my ache persists, how shall my heart sustain

Love has a need for patience, desires are a strain

as long my ache persists, how shall my heart sustain

मिर्ज़ा ग़ालिब

आते आते मिरा नाम सा रह गया

उस के होंटों पे कुछ काँपता रह गया

वसीम बरेलवी

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें

जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

should we now be parted, in dreams we might be found

like dried flowers found in books, fragile, fraying browned

should we now be parted, in dreams we might be found

like dried flowers found in books, fragile, fraying browned

अहमद फ़राज़

अब तक दिल-ए-ख़ुश-फ़हम को तुझ से हैं उमीदें

ये आख़िरी शमएँ भी बुझाने के लिए

my heart is optimistic yet, its hopes are still alive

come to snuff it out, let not this final flame survive

my heart is optimistic yet, its hopes are still alive

come to snuff it out, let not this final flame survive

अहमद फ़राज़

अब तो मिलिए बस लड़ाई हो चुकी

अब तो चलिए प्यार की बातें करें

अख़्तर शीरानी

अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँ

अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता तुम हो जाता हूँ

अनवर शऊर

अहल-ए-हवस तो ख़ैर हवस में हुए ज़लील

वो भी हुए ख़राब, मोहब्बत जिन्हों ने की

अहमद मुश्ताक़

दोस्त हम ने तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद

महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी कभी

नासिर काज़मी

अपने जैसी कोई तस्वीर बनानी थी मुझे

मिरे अंदर से सभी रंग तुम्हारे निकले

सालिम सलीम

अपनी आँखों के समुंदर में उतर जाने दे

तेरा मुजरिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे

नज़ीर बाक़री

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा

राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

sorrows other than love's longing does this life provide

comforts other than a lover's union too abide

sorrows other than love's longing does this life provide

comforts other than a lover's union too abide

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

बस एक ही बला है मोहब्बत कहें जिसे

वो पानियों में आग लगाती है आज भी

अजीत सिंह हसरत

भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम

क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए

ख़ुमार बाराबंकवी

बुलबुल के कारोबार पे हैं ख़ंदा-हा-ए-गुल

कहते हैं जिस को इश्क़ ख़लल है दिमाग़ का

मिर्ज़ा ग़ालिब

चलो अच्छा हुआ काम गई दीवानगी अपनी

वगरना हम ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते

twas a good thing that my madness was to some avail

else, for my state, what other reason could the world I show?

twas a good thing that my madness was to some avail

else, for my state, what other reason could the world I show?

क़तील शिफ़ाई

चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ

तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ

साहिर लुधियानवी

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है

हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है

हसरत मोहानी

दिल धड़कने का सबब याद आया

वो तिरी याद थी अब याद आया

नासिर काज़मी

दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने दिया

जब चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया

जोश मलीहाबादी

दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं

कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

जिगर मुरादाबादी

दिल मुझे उस गली में ले जा कर

और भी ख़ाक में मिला लाया

मीर तक़ी मीर

दिल पे आए हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं

लोग अब मुझ को तिरे नाम से पहचानते हैं

क़तील शिफ़ाई

दिल थाम के करवट पे लिए जाऊँ हूँ करवट

वो आग लगी है कि बुझाए बने है

कलीम आजिज़

दुनिया के सितम याद अपनी ही वफ़ा याद

अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद

जिगर मुरादाबादी

इक बे-क़रार दिल से मुलाक़ात कीजिए

जब मिल गए हैं आप तो कुछ बात कीजिए

नौशाद अली

एक चेहरा है जो आँखों में बसा रहता है

इक तसव्वुर है जो तन्हा नहीं होने देता

जावेद नसीमी

इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है

सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है

जिगर मुरादाबादी

एक मुद्दत से तिरी याद भी आई हमें

और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं

फ़िराक़ गोरखपुरी

इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए

और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए

विपुल कुमार

फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा था

सामने बैठा था मेरे और वो मेरा था

अदीम हाशमी

गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं

हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं

I burn up in the flames of unfulfilled desire

like lanterns are, at eventide I am set afire

I burn up in the flames of unfulfilled desire

like lanterns are, at eventide I am set afire

क़तील शिफ़ाई

ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ महसूस हो जहाँ

मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया

साहिर लुधियानवी

हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी

क्यूँ तुम आसान समझते थे मोहब्बत मेरी

seeing my condition, she laughs and asks of me

"Easy did you then imagine, loving me would be?"

seeing my condition, she laughs and asks of me

"Easy did you then imagine, loving me would be?"

अमीर मीनाई

हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले

कितने प्यारे हैं मुझे छोड़ के जाने वाले

विपुल कुमार

होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है

इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है

निदा फ़ाज़ली

हम बहुत दूर निकल आए हैं चलते चलते

अब ठहर जाएँ कहीं शाम के ढलते ढलते

इक़बाल अज़ीम

हम को किस के ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही

किस ने तोड़ा दिल हमारा ये कहानी फिर सही

मसरूर अनवर

इब्तिदा वो थी कि जीने के लिए मरता था मैं

इंतिहा ये है कि मरने की भी हसरत रही

At the start, life prolonged,was my deep desire

now at the end, even for death, I do not aspire

At the start, life prolonged,was my deep desire

now at the end, even for death, I do not aspire

माहिर-उल क़ादरी

इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से

मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँ नहीं करते

फ़रहत एहसास

इस तअल्लुक़ में नहीं मुमकिन तलाक़

ये मोहब्बत है कोई शादी नहीं

अनवर शऊर

इश्क़ मुझ को नहीं वहशत ही सही

मेरी वहशत तिरी शोहरत ही सही

If not love, then madness, my feelings deem you be

And so be it my craziness is cause of fame for thee

If not love, then madness, my feelings deem you be

And so be it my craziness is cause of fame for thee

मिर्ज़ा ग़ालिब

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद

अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता

अकबर इलाहाबादी

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब'

कि लगाए लगे और बुझाए बने

Love is not in one's control, this is that fire roused

It cannot be willed to ignite, nor can it be doused

Love is not in one's control, this is that fire roused

It cannot be willed to ignite, nor can it be doused

मिर्ज़ा ग़ालिब

इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया

दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया

my being did, from love's domain, the joy of life procure

obtained such cure for life's travails, which itself had no cure

my being did, from love's domain, the joy of life procure

obtained such cure for life's travails, which itself had no cure

मिर्ज़ा ग़ालिब

इश्क़ सुनते थे जिसे हम वो यही है शायद

ख़ुद-बख़ुद दिल में है इक शख़्स समाया जाता

अल्ताफ़ हुसैन हाली

जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ

जाने क्यूँ लोग मिरे नाम से जल जाते हैं

whenever my name happens to be linked to thee

I wonder why these people burn with jealousy

whenever my name happens to be linked to thee

I wonder why these people burn with jealousy

क़तील शिफ़ाई

जब से तू ने मुझे दीवाना बना रक्खा है

संग हर शख़्स ने हाथों में उठा रक्खा है

हकीम नासिर

जब तुम से मोहब्बत की हम ने तब जा के कहीं ये राज़ खुला

मरने का सलीक़ा आते ही जीने का शुऊर जाता है

साहिर लुधियानवी

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